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क्या ईरानी तेल का टैंकर भारत की बजाय चीन की ओर बढ़ रहा है? जानें पूरी कहानी

पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच, एक टैंकर जो ईरान से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा था, अचानक अपना मार्ग बदलकर चीन की दिशा में बढ़ने लगा है। यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि यह खेप भारत पहुंचती, तो यह 2019 के बाद पहली बार होता। विशेषज्ञों का मानना है कि भुगतान से जुड़ी शर्तें इस बदलाव का मुख्य कारण हो सकती हैं। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और विशेषज्ञों की राय।
 

वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता


पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। इस संदर्भ में, एक टैंकर जो ईरान से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा था, अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की दिशा में बढ़ने लगा है। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि यह खेप भारत पहुंचती, तो यह 2019 के बाद पहली बार होता जब भारत ईरानी तेल खरीदता।


टैंकर का नया गंतव्य

हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद, भारतीय रिफाइनरियां ईरान से तेल खरीदने के नए अवसरों की तलाश कर रही थीं। जहाजों की निगरानी करने वाली एजेंसी 'केप्लर' के अनुसार, 'पिंग शुन' नामक यह अफ्रामैक्स टैंकर पहले गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अब इसका गंतव्य चीन के दोंगयिंग की ओर बदल गया है। हालांकि, जहाज के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) में दर्ज जानकारी हमेशा अंतिम नहीं होती, और यात्रा के दौरान बदलाव संभव है।


विश्लेषकों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे भुगतान से जुड़ी शर्तें एक प्रमुख कारण हो सकती हैं। पहले जहां तेल आपूर्ति पर 30 से 60 दिनों का क्रेडिट मिलता था, वहीं अब विक्रेता तुरंत या कम समय में भुगतान की मांग कर रहे हैं। इससे लेन-देन जटिल हो गया है और सौदे पर असर पड़ा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस तेल का असली खरीदार कौन है, लेकिन वाडिनार स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी को संभावित गंतव्य माना जा रहा था।


व्यापारिक जोखिम और वित्तीय शर्तें

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरानी तेल के साथ यात्रा के दौरान गंतव्य बदलना असामान्य नहीं है, लेकिन यह मौजूदा समय में व्यापारिक जोखिम और वित्तीय शर्तों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। यदि भुगतान से जुड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं, तो यह खेप अभी भी भारत पहुंच सकती है।


भारत पहले ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता था, खासकर 'ईरान लाइट' और 'ईरान हैवी' ग्रेड। लेकिन 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के सख्त होने के बाद, मई 2019 से भारत ने यह आयात पूरी तरह बंद कर दिया था। उस समय भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण थी.


भुगतान प्रणाली की चुनौतियाँ

वर्तमान में एक और बड़ी चुनौती भुगतान प्रणाली को लेकर है, क्योंकि ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली 'स्विफ्ट' से बाहर रखा गया है। ऐसे में भुगतान के विकल्प सीमित हो गए हैं, जिससे तेल व्यापार प्रभावित हो रहा है।