क्या पाकिस्तान का मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम है महज एक दिखावा?
पाकिस्तान का नया कदम: FATF की बैठक से पहले इनाम की घोषणा
नई दिल्ली: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले, पाकिस्तान ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश की है। वित्तीय प्रतिबंधों और जवाबदेही से बचने के लिए, पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेता मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) द्वारा जारी की गई 'मोस्ट वांटेड' आतंकवादियों की सूची में मसूद अजहर का नाम शामिल किया गया है, जिसे कूटनीतिक हलकों में केवल एक दिखावटी कदम माना जा रहा है।
इनाम की राशि में वृद्धि
पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर कार्रवाई का दावा किया है। इससे पहले, 2021 में FATF की ग्रे लिस्ट के दबाव में, पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब, पांच साल बाद, इस राशि को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है। 2021 में, पाकिस्तान ने कहा था कि मसूद अजहर उसकी सीमा से बाहर जाकर अफगानिस्तान चला गया है।
इस्लामाबाद की मंशा का पर्दाफाश
एक ओर, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसकी धरती पर नहीं है और वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। दूसरी ओर, अपनी ही जांच एजेंसी के माध्यम से उस पर इनाम घोषित करना उसके दोहरे रवैये को स्पष्ट करता है। भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रचने वाले इस आतंकवादी के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। भारतीय सेना द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय पर की गई कार्रवाई ने इस ढांचे को हिलाकर रख दिया था।
अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश
अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक से पहले उठाए गए इस कदम ने पाकिस्तान की मंशा और प्रशासनिक नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई वास्तविक धरपकड़ की योजना नहीं है, बल्कि कूटनीतिक दबाव को कम करने का एक पुराना और घिसा-पिटा पैंतरा है। अब यह देखना होगा कि क्या वैश्विक निगरानी संस्था FATF पाकिस्तान के इस कागजी दिखावे को स्वीकार करती है या फिर उस पर वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाती है।