क्या पीएम मोदी की इजरायल यात्रा से जुड़ा है ईरान पर हमला? जानें इजरायल की सफाई
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर
नई दिल्ली: हाल ही में मध्य पूर्व में शुरू हुए सैन्य संघर्ष ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई और कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाया गया।
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा और हमले की टाइमिंग
इन घटनाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर चर्चा तेज हो गई है। पीएम मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल में थे, और उनके लौटने के दो दिन बाद ही ईरान पर हमला हुआ। इस समय को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं, जिसके बाद इजरायल को बार-बार स्पष्ट करना पड़ा कि इस सैन्य कार्रवाई का भारत या पीएम मोदी की यात्रा से कोई संबंध नहीं था।
इजरायल के विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान उन्हें ईरान पर संभावित हमलों की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने रायसीना डायलॉग में वर्चुअल तरीके से इस मामले पर विस्तार से चर्चा की।
सैन्य कार्रवाई का निर्णय
गिदोन सार ने बताया कि पीएम मोदी की इजरायल यात्रा 26 फरवरी को समाप्त हुई थी और सैन्य कार्रवाई का अंतिम निर्णय उनके लौटने के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, "हम पीएम मोदी को इस बारे में सूचित नहीं कर सके क्योंकि यह निर्णय उनके जाने के बाद लिया गया था।"
अमेरिका-इजरायल का संयुक्त सैन्य अभियान
पीएम मोदी के दौरे के दो दिन बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई और कई महत्वपूर्ण शहरों पर हवाई हमले किए गए।
इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिसमें इजरायल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल थे, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
हमले के पीछे के कारण
गिदोन सार ने इस सैन्य कार्रवाई के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए। उन्होंने कहा कि यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह विफल हो गई।
उनके अनुसार, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा था और नई बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा था। इसके अलावा, ईरान पर हिजबुल्लाह, हमास और हूती विद्रोहियों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया गया।
उन्होंने कहा, "संभवतः अब हमें ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना होगा।"
इजरायल की सफाई का कारण
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और संतुलित कूटनीति का समर्थन करता रहा है। ऐसे में इजरायल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत पर यह आरोप न लगे कि उसने ईरान के खिलाफ किसी सैन्य योजना का समर्थन किया था।
हमले के बाद भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनका इजरायल दौरा और उसके तुरंत बाद हुआ हमला किसी बड़े रणनीतिक योजना का हिस्सा हो सकता है।
इजरायल इन अटकलों को खत्म करना चाहता है और यह स्पष्ट कर रहा है कि इस सैन्य कार्रवाई में भारत की कोई भूमिका नहीं थी।
सोशल मीडिया की थ्योरी का खंडन
सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि पीएम मोदी की मौजूदगी के दौरान युद्ध को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था और उनके लौटने के बाद ही हमला किया गया।
हालांकि, इजरायल ने इस तरह की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भी इस मुद्दे पर सफाई दी थी।
उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला कोई पहले से तय योजना नहीं थी, बल्कि यह एक ऑपरेशनल मौका था जो खुफिया जानकारी के आधार पर पीएम मोदी के लौटने के बाद सामने आया। इसके बाद शनिवार सुबह इजरायली सुरक्षा कैबिनेट से हमले की अंतिम मंजूरी ली गई।