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क्या मथुरा जेल में होगी मुस्कान रस्तोगी की फांसी? जानें पूरी कहानी

मेरठ के नीले ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद सवाल उठता है कि फांसी कहाँ दी जाएगी। मथुरा जेल में महिलाओं के लिए विशेष फांसीघर होने के कारण यह चर्चा का विषय बना है। हालांकि, फांसी की प्रक्रिया में कई कानूनी चरण बाकी हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी और फांसी की प्रक्रिया के बारे में।
 

नई दिल्ली: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मिली मौत की सजा


मेरठ के नीले ड्रम कांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि यह सजा लागू होती है, तो फांसी कहाँ दी जाएगी। क्या मुस्कान को मेरठ जेल में फांसी दी जाएगी, या उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाएगा?


महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष फांसीघर केवल मथुरा जेल में उपलब्ध है। इसी कारण मुस्कान के मामले में मथुरा का नाम बार-बार सामने आ रहा है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उन्हें निश्चित रूप से वहीं फांसी दी जाएगी। अदालत के निर्णय के बाद कई कानूनी प्रक्रियाएँ अभी बाकी हैं। अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। इसलिए फिलहाल किसी भी जेल के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।


फांसी से पहले डेथ वारंट की आवश्यकता

मौत की सजा का मतलब यह नहीं है कि फांसी की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है। इसके लिए कानून के निर्धारित कदमों का पालन करना आवश्यक है। सबसे पहले, सत्र अदालत के फैसले की पुष्टि उच्च न्यायालय से होनी चाहिए। दोषी को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी होता है। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। परिस्थितियों के अनुसार दया याचिका का विकल्प भी खुला रहता है।


जब ये सभी कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी हो जाती हैं, तब संबंधित अदालत के आदेश और डेथ वारंट के आधार पर आगे की कार्रवाई होती है। डेथ वारंट में फांसी से संबंधित आवश्यक निर्देश होते हैं। यही कारण है कि केवल निचली अदालत की सजा के आधार पर फांसी की तारीख तय नहीं की जा सकती। इस मामले में अभी कई चरण बाकी हैं और इसमें समय लग सकता है।


मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड

सौरभ राजपूत हत्याकांड मार्च 2025 में सामने आया था। आरोप था कि उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या की और शव को छिपाने का प्रयास किया। जांच के दौरान पता चला कि सौरभ के शव को टुकड़ों में काटा गया था। इन टुकड़ों को नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और ऊपर से सीमेंट डालकर छिपाने का प्रयास किया गया। इस घटना की खबर फैलते ही यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था।


पुलिस जांच और मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी।