क्या शशि थरूर की याचिका से फर्जी वीडियो का खतरा कम होगा? जानें पूरी कहानी
नई दिल्ली में शशि थरूर की कानूनी लड़ाई
नई दिल्ली: सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में फर्जी वीडियो और मॉर्फ्ड सामग्री का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी संदर्भ में कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, छवि, आवाज और व्यक्तित्व का दुरुपयोग किया जा रहा है। थरूर ने अदालत से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी डीपफेक और एआई-आधारित सामग्री को हटाया जाए, जो इंटरनेट और अन्य प्लेटफार्मों पर प्रसारित हो रही हैं। इस मामले की सुनवाई 8 मई को जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ के समक्ष होगी।
थरूर की याचिका में उठाए गए मुद्दे
थरूर ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक पहचान का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। उनका दावा है कि कई ऑनलाइन प्लेटफार्मों और अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उनकी छवि का उपयोग ऐसे वीडियो और डिजिटल सामग्री में किया जा रहा है, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाया जाए और भविष्य में उनकी अनुमति के बिना उनके नाम या चेहरे का उपयोग करने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, उन्होंने अदालत से संबंधित पक्षों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है।
डीपफेक और एआई कंटेंट का बढ़ता खतरा
डीपफेक और एआई कंटेंट को लेकर बढ़ी चिंता
हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक और एआई टूल्स के माध्यम से फर्जी वीडियो और तस्वीरें बनाना आसान हो गया है। कई बार मशहूर हस्तियों की आवाज और चेहरों का उपयोग करके भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है। थरूर की याचिका भी इसी बढ़ते खतरे से संबंधित है। उनका कहना है कि इस तरह के कंटेंट से न केवल उनकी छवि प्रभावित हो सकती है, बल्कि यह समाज में गलत संदेश भी फैला सकता है। यह याचिका लॉ फर्म ट्राईलीगल के पार्टनर और वरिष्ठ वकील निखिल नरेंद्रन के माध्यम से दायर की गई है।
अन्य हस्तियों की कानूनी लड़ाई
कई बड़ी हस्तियां पहले भी पहुंच चुकी हैं कोर्ट
इस कदम के साथ शशि थरूर अब उन चर्चित हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपने पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत का सहारा लिया है। इससे पहले अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर भी इसी तरह के मामलों में कोर्ट पहुंच चुके हैं। दोनों ने अपने नाम, आवाज और तस्वीर के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए बिना अनुमति किसी भी विज्ञापन, मर्चेंडाइज या एआई-जनरेटेड कंटेंट में उनकी पहचान के उपयोग पर रोक लगाई थी।
कानूनी जागरूकता का बढ़ता महत्व
सार्वजनिक पहचान को लेकर बढ़ रही कानूनी जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में पर्सनैलिटी राइट्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एआई तकनीक के कारण किसी भी व्यक्ति की तस्वीर या आवाज का गलत इस्तेमाल कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है। इसी वजह से अब कई सार्वजनिक हस्तियां अपनी पहचान और छवि की सुरक्षा के लिए अदालत का सहारा ले रही हैं। शशि थरूर की याचिका को भी इसी बढ़ती कानूनी जागरूकता का हिस्सा माना जा रहा है।
शशि थरूर का परिचय
लेखक, राजनयिक और अनुभवी राजनेता हैं थरूर
केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि प्रसिद्ध लेखक और पूर्व राजनयिक भी हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में लगभग 30 वर्षों तक सेवाएं दीं और अंडर-सेक्रेटरी-जनरल जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे। भारत सरकार में भी उन्होंने विदेश मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। थरूर अपनी प्रभावशाली अंग्रेजी और बेहतरीन भाषण शैली के लिए काफी लोकप्रिय हैं। इसके अलावा उनकी किताबें 'An Era of Darkness' और 'Why I Am a Hindu' भी काफी चर्चा में रही हैं.