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क्या स्पेस में बढ़ती है एस्ट्रोनॉट्स की हाइट? जानें इसके पीछे का विज्ञान

क्या आप जानते हैं कि आपकी हाइट दिनभर में बदलती है? वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रैविटी के प्रभाव से हम दिन में छोटे हो जाते हैं, जबकि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट बढ़ जाती है। जानें कि नासा के शोध के अनुसार यह कैसे संभव है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई अंतरिक्ष में बढ़ती है और इसके लिए क्या कारण हैं।
 

हाइट में बदलाव का विज्ञान

नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि आपकी लंबाई दिनभर में बदलती रहती है? अधिकांश लोग मानते हैं कि उनकी हाइट स्थिर रहती है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि ग्रैविटी के प्रभाव से हम दिन में 1-2 सेंटीमीटर छोटे हो जाते हैं। आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट कैसे बढ़ जाती है।


नासा के अनुसार, सुबह उठने पर हम सबसे लंबे होते हैं, क्योंकि रातभर लेटने से हमारी रीढ़ की हड्डी फैल जाती है। लेकिन अंतरिक्ष में यह परिवर्तन और भी अधिक होता है। नासा के शोध के अनुसार, माइक्रोग्रैविटी में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट औसतन 3 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, खासकर पहले 3-4 दिनों में। यह वृद्धि मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी में होती है।


धरती पर ग्रैविटी रीढ़ की डिस्क्स को दबाती है, जबकि अंतरिक्ष में कोई दबाव नहीं होता, जिससे डिस्क्स फैल जाती हैं। इससे हाइट, बैठने की स्थिति और कंधों की स्थिति प्रभावित होती है। नासा ने बताया कि एस्ट्रोनॉट केट रूबिन्स, जो मिशन एक्स का हिस्सा थीं, उनकी 'अर्थ हाइट' 171 सेमी थी, जो अंतरिक्ष में बढ़कर 174.4 सेमी हो गई। यानी लगभग 3.4 सेमी की वृद्धि। जब वह धरती पर लौटीं, तो ग्रैविटी के प्रभाव से उनकी हाइट फिर से पहले जैसी हो गई।


नासा के ह्यूमन रिसर्च प्रोग्राम में एस्ट्रोनॉट माइक बैरेट और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर सुधाकर राजुलु ने एक वीडियो में बताया है कि अंतरिक्ष में शरीर कैसे बदलता है। इस बदलाव को समझने के लिए नासा ने 'व्हाट योर स्पेस हाइट?' नाम की एक मजेदार गतिविधि शुरू की। यह गतिविधि स्कूल के बच्चों और छात्रों के लिए थी, जिसमें उन्हें सुबह जल्दी उठकर अपनी हाइट मापने के लिए कहा गया।


यह गतिविधि एंथ्रोपोमेट्री या शरीर मापन विज्ञान से संबंधित है। नासा में एंथ्रोपोमेट्रिस्ट्स की एक टीम होती है, जो एस्ट्रोनॉट्स के माप लेकर स्पेसक्राफ्ट, स्पेस सूट, सीट साइज, हैच ओपनिंग और आईएसएस के डिजाइन तय करती है। अंतरिक्ष में हाइट बढ़ने से कंधे ऊंचे हो जाते हैं, जिससे ऊंची चीजों तक पहुंचना आसान हो जाता है। लेकिन, डिजाइन पहले से सही होना आवश्यक है, क्योंकि अंतरिक्ष में बदलाव करना चुनौतीपूर्ण होता है।


एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में काम करते समय अपने पैरों को फर्श के स्टैंड में फंसाकर खुद को संभालते हैं। स्पेसक्राफ्ट में कई फीचर्स एडजस्टेबल होते हैं, क्योंकि लॉन्च और वापसी के समय हाइट अलग-अलग होती है।