क्या हम सच में भारतीय नागरिक हैं? एक गहन प्रश्न
नागरिकता का सवाल
कभी-कभी हम खुद से पूछते हैं, "मैं कौन हूँ?" यह सवाल कभी युवा अवस्था में, कभी मध्य आयु में, या फिर किसी साधारण दिन अचानक मन में आता है। यह सवाल तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम अपने देश की नागरिकता पर विचार करते हैं।
हाल ही में, पासपोर्ट सेवा दिवस पर, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं। इस बयान ने पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया।
सोशल मीडिया पर इस पर मजेदार मीम्स बने, जिसमें एक प्रेशर कुकर की तस्वीर के साथ लिखा था कि हर भारतीय घर में यह मिलता है।
हालांकि, असली मुद्दा यह है कि हममें से अधिकांश ने कभी यह सवाल नहीं पूछा कि हम भारतीय नागरिक हैं या नहीं।
भारत में कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जो स्पष्ट रूप से कहता हो कि यह व्यक्ति भारतीय नागरिक है। नागरिकता कानून के तहत यह तय होता है।
दुनिया के अन्य देशों में नागरिकता के प्रमाण के लिए पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज होते हैं, लेकिन भारत में यह स्थिति अलग है।
मेरे घर में कई दस्तावेज हैं, लेकिन कोई एक ऐसा नहीं है जो कहता हो कि मैं भारत का नागरिक हूँ।
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की अंतिम सूची में कई लोग शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि उनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे।
यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में अपने देश के नागरिक हैं।
भारत ने नागरिकता की पहचान के लिए अद्भुत व्यवस्था बनाई है, लेकिन अब उसे यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को यह विश्वास हो कि वह इस गणराज्य का हिस्सा है।