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क्या है पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की रणनीति? जानें सर्वदलीय बैठक के अहम बिंदु

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश, और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने सभी चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन दिया। जानें इस बैठक के प्रमुख बिंदु और भारत की कूटनीतिक रणनीति।
 

सर्वदलीय बैठक का आयोजन


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में, बुधवार को केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया कि देश में किसी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है और ऊर्जा की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है।


होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा

बैठक में घरेलू एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जानकारी दी गई, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जहाँ ईरान से जुड़े तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। विदेश मंत्री ने बताया कि चार भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से पहुँच चुके हैं और अन्य जहाजों के भी जल्द आने की उम्मीद है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया भी जारी है, जिसमें अब तक लगभग 4.25 लाख लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश

बैठक में पाकिस्तान द्वारा ईरान संकट में मध्यस्थता की पेशकश का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान लंबे समय से इस तरह की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत इस प्रकार की 'दलाल' कूटनीति का हिस्सा नहीं बनेगा। यह टिप्पणी उस समय आई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश की थी।


किरण रिजिजू का बयान

करीब दो घंटे तक चली इस बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी सवालों और चिंताओं का विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि विपक्षी दल भारत की तैयारियों और उठाए गए कदमों से संतुष्ट नजर आए। कई नेताओं ने संकट के समय में सरकार को पूर्ण समर्थन देने की बात भी कही।


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

हालांकि, बैठक को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे देर से उठाया गया कदम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर और समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने सरकार की विदेश नीति पर चिंता जताई।


सरकार ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि भारत लगातार सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है और सभी पक्षों के संपर्क में है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने विपक्ष पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की।