क्या है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन? जानें इसके खतरनाक प्रभाव और रोकथाम के उपाय
महिलाओं के अधिकारों पर गंभीर खतरा
नई दिल्ली: महिलाओं के अधिकारों पर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है, लेकिन कई प्रथाएं आज भी मौजूद हैं जो लड़कियों की शारीरिक और मानसिक स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। इनमें से एक है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM), जिसे आमतौर पर महिलाओं का 'खतना' कहा जाता है। यह प्रथा लंबे समय से विवाद का विषय रही है और अब इस पर कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान यह मामला फिर से चर्चा में आया। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित इस प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर 9 जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि FGM क्या है, इसके खतरनाक प्रभाव क्या हैं और इसे रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) क्या कदम उठा रहा है।
23 करोड़ से अधिक महिलाएं प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 23 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन का शिकार हो चुकी हैं।
यह प्रथा अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के 30 से अधिक देशों में अब भी प्रचलित है। अधिकांश मामलों में यह प्रक्रिया छोटी बच्चियों और 15 साल तक की लड़कियों पर की जाती है।
फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) क्या है?
FGM का अर्थ है महिलाओं या लड़कियों के बाहरी जननांगों को आंशिक या पूरी तरह से काटना या किसी अन्य तरीके से नुकसान पहुंचाना। यह प्रक्रिया बिना किसी चिकित्सीय आवश्यकता के की जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कोई चिकित्सा लाभ नहीं है। इसके विपरीत, यह महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है।
FGM के खतरनाक प्रभाव
FGM के कारण लड़कियों और महिलाओं को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें शामिल हैं:
- तेज दर्द: FGM के दौरान अत्यधिक असहनीय दर्द होता है।
- अत्यधिक रक्तस्राव: कई मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है।
- सूजन और बुखार: जननांगों में सूजन और तेज बुखार की समस्या हो सकती है।
- संक्रमण का खतरा: टेटनस समेत कई गंभीर संक्रमण होने का खतरा रहता है।
- पेशाब में परेशानी: पेशाब करते समय दर्द और रुकावट की समस्या सामने आती है।
- घाव भरने में दिक्कत: कटे हुए हिस्से में लंबे समय तक घाव बने रह सकते हैं।
- आसपास के अंगों को नुकसान: जननांगों के आसपास के हिस्सों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
- सदमा और मौत: कुछ मामलों में लड़कियां मानसिक सदमे में चली जाती हैं और कई बार मौत तक हो जाती है।
FGM के प्रकार
टाइप 1: इसमें क्लिटोरिस के बाहरी हिस्से को आंशिक या पूरी तरह हटाया जाता है।
टाइप 2: इसमें क्लिटोरिस और योनि के अंदरूनी हिस्सों को काटा जाता है।
टाइप 3 (इन्फिबुलेशन): यह सबसे गंभीर प्रकार है, जिसमें योनि के मुंह को सिकोड़कर सिल दिया जाता है।
टाइप 4: इसमें छेद करना, खुरचना, जलाना या किसी भी तरीके से जननांगों को नुकसान पहुंचाना शामिल है।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
FGM का खतरा सबसे ज्यादा छोटी बच्चियों और किशोरियों पर होता है। हालांकि, कई बार वयस्क महिलाओं के साथ भी यह प्रक्रिया की जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के 31 देशों में करोड़ों महिलाएं इसका शिकार हो चुकी हैं और हर साल करीब 40 लाख लड़कियों पर इसका खतरा बना रहता है।
FGM क्यों की जाती है?
सामाजिक दबाव: कई समाजों में इसे परंपरा और सम्मान से जोड़ा जाता है।
शादी के लिए 'तैयार' करने की सोच: कुछ लोग इसे लड़कियों को शादी योग्य बनाने का तरीका मानते हैं।
धार्मिक मान्यता: कुछ समुदाय इसे धार्मिक प्रथा मानते हैं, जबकि किसी भी प्रमुख धार्मिक ग्रंथ में इसका उल्लेख नहीं मिलता।
चिंता की बात यह है कि कई मामलों में स्वास्थ्यकर्मी भी FGM जैसी प्रक्रियाओं में शामिल पाए गए हैं।
WHO की पहलें
2008 में WHO ने FGM खत्म करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। WHO स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गाइडलाइन और प्रशिक्षण देता है ताकि इस प्रथा को रोका जा सके। इसके अलावा, WHO लगातार रिसर्च कर रहा है कि FGM को खत्म करने के लिए कौन से उपाय सबसे प्रभावी हैं।
WHO ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर मेडिकल FGM के खिलाफ वैश्विक रणनीति तैयार की है और विभिन्न देशों को इसे लागू करने में मदद कर रहा है।
मानवाधिकारों का मुद्दा
विशेषज्ञों के अनुसार, FGM केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है। इसे महिलाओं और बच्चियों की शारीरिक स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ माना जाता है।
इसी कारण, दुनिया भर में इस प्रथा को समाप्त करने की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।