क्या है 'सफेदपोश आतंकवाद'? राजनाथ सिंह ने शिक्षा और नैतिकता पर की चर्चा
राजनाथ सिंह की चिंता: सफेदपोश आतंकवाद
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में बढ़ते 'सफेदपोश आतंकवाद' पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के साथ नैतिकता और मूल्य नहीं जुड़े हों, तो यह समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनका स्पष्ट कहना था कि केवल डिग्रियां किसी व्यक्ति को अच्छा इंसान नहीं बनातीं, बल्कि चरित्र और जिम्मेदारी की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस
राजनाथ सिंह ने भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि आजकल एक नया और चिंताजनक चलन देखने को मिल रहा है, जिसमें उच्च शिक्षित लोग भी समाज और राष्ट्र के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे 'सफेदपोश आतंकवाद' कहा और इसे बेहद खतरनाक स्थिति बताया।
लाल किला विस्फोट का संदर्भ
उन्होंने अपने बयान में दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार बम विस्फोट का उल्लेख किया। रक्षा मंत्री ने बताया कि इस हमले के आरोपी पेशे से डॉक्टर थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केवल शिक्षा या पेशेवर सफलता नैतिकता की गारंटी नहीं देती।
शिक्षा और संस्कार का महत्व
राजनाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल नौकरी या आर्थिक सफलता नहीं होना चाहिए। शिक्षा का मकसद इंसान के भीतर नैतिकता, विनम्रता, जिम्मेदारी और मानवता का विकास करना भी है। यदि कोई शिक्षा प्रणाली यह कार्य नहीं कर पा रही है, तो वह अधूरी मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार आतंकवादी या अपराधी अशिक्षित नहीं होते, बल्कि उनके पास विश्वविद्यालय की डिग्रियां होती हैं, लेकिन उनमें सही मूल्यों और नैतिक सोच की कमी होती है।
धर्म की सही व्याख्या
रक्षा मंत्री ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ केवल मंदिर, मस्जिद या चर्च जाना नहीं है। असली धर्म कर्तव्य, जिम्मेदारी और सही आचरण से जुड़ा होता है। नैतिकता और धर्म से रहित शिक्षा न केवल समाज के लिए बेकार होती है, बल्कि कई बार नुकसानदायक भी साबित हो सकती है।
भारत की प्रगति में विश्वविद्यालयों की भूमिका
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे नागरिक तैयार करने चाहिए, जो न केवल कुशल पेशेवर हों, बल्कि जिम्मेदार, नैतिक और देश के प्रति समर्पित भी हों। तभी शिक्षा समाज और राष्ट्र के लिए सही मायनों में उपयोगी साबित होगी।