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क्वाड देशों की महत्वपूर्ण बैठक: क्या है हिंद-प्रशांत क्षेत्र की नई रणनीति?

नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक हो रही है, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और पश्चिम एशिया के संकट पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। बैठक में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे। यह सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, जिसमें तकनीकी सहयोग और क्रिटिकल मिनरल की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला पर भी ध्यान दिया जाएगा। जानें इस बैठक के प्रमुख मुद्दे और इसके संभावित प्रभाव।
 

नई दिल्ली में क्वाड देशों की बैठक


नई दिल्ली: आज हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शांति और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। भारत इस प्रभावशाली समूह का वर्तमान अध्यक्ष है, इसलिए यह बैठक भारत द्वारा आयोजित की जा रही है।


डॉ. एस. जयशंकर करेंगे बैठक की अध्यक्षता


इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। यह सम्मेलन वाशिंगटन में हुई पिछली बैठक के लगभग एक साल बाद हो रहा है और वैश्विक कूटनीति के लिए यह एक संवेदनशील समय है।


दिग्गज कूटनीतिज्ञों की उपस्थिति


बैठक में भाग लेने के लिए सदस्य देशों के प्रमुख कूटनीतिज्ञ नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी शामिल होंगे। ये प्रतिनिधि न केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं। यह बैठक आपसी विश्वास को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।


तकनीकी सहयोग और क्रिटिकल मिनरल पर ध्यान


विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना और आधुनिक प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना है। क्वाड देश बुनियादी ढांचे के विकास, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी में सुधार और आपदा प्रबंधन जैसी पहलों की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। यह बैठक यह स्पष्ट करेगी कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खुला और नियम-आधारित बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।


पश्चिम एशिया का संकट एजेंडे में प्रमुख


बैठक की तैयारियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस बार क्वाड कूटनीतिज्ञों का मुख्य ध्यान पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्ष और उसके गंभीर आर्थिक प्रभावों पर रहेगा। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक जलमार्गों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, यूक्रेन संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता पर भी चारों देश मिलकर साझा रणनीति विकसित करेंगे।