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खुदरा महंगाई दर में वृद्धि, चार फीसदी के पार पहुंची

खुदरा महंगाई दर में वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है, जो अब 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.32 फीसदी तक बढ़ गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पिछले छह महीनों से महंगाई में लगातार वृद्धि हो रही है। इस लेख में जानें कि इसके पीछे के कारण क्या हैं और भविष्य में ब्याज दरों में संभावित बदलाव कैसे हो सकते हैं।
 

महंगाई की नई स्थिति


नई दिल्ली: खाद्य वस्तुओं की महंगाई के चलते खुदरा महंगाई दर डेढ़ साल में पहली बार चार फीसदी से ऊपर चली गई है। जनवरी 2025 के बाद यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो गई है। रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई की औसत सीमा चार फीसदी तय की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में यह दर 4.38 फीसदी तक पहुंच गई।


महंगाई में लगातार वृद्धि

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले छह महीनों से खुदरा महंगाई की दर में वृद्धि हो रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून में सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ी है, जिसके कारण खुदरा महंगाई दर 4.38 फीसदी तक पहुंच गई। इस साल जनवरी में यह दर 2.74 फीसदी थी, जबकि मई में यह 3.93 फीसदी थी।


खाद्य वस्तुओं की महंगाई

सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जून में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.32 फीसदी तक पहुंच गई, जो मई में 4.38 फीसदी थी। यह लगातार बढ़ोतरी दर्शाती है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे महंगाई में वृद्धि हो रही है।


भविष्य की संभावनाएं

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई की अधिकतम सीमा छह फीसदी तय की है, इसलिए वर्तमान महंगाई दर अभी भी इस सीमा के भीतर है। फिर भी, यह आशंका जताई जा रही है कि ब्याज दरों में वृद्धि हो सकती है। यदि महंगाई के कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है, तो यह भविष्य में आर्थिक विकास की दर को प्रभावित कर सकता है।


अल नीनो और मानसून

पश्चिम एशिया में संघर्ष के अलावा, इस बार अल नीनो के कारण मानसून में कम बारिश होने की संभावना है। ईंधन की आपूर्ति में बाधा और मानसून की स्थिति को देखते हुए, रिजर्व बैंक ने जून में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में महंगाई के अनुमान को 4.6 से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया था।


महंगाई के आकलन में बदलाव

केंद्र सरकार ने 2024 को बेस ईयर बनाकर महंगाई के आकलन की नई श्रृंखला शुरू की है। जनवरी में संशोधित खुदरा महंगाई 2.74 फीसदी दर्ज की गई थी। इसके बाद कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। फरवरी में यह 3.21, मार्च में 3.4, अप्रैल में 3.48 और मई में 3.93 फीसदी रही। सरकार ने महंगाई के आकलन के लिए न केवल बेस ईयर बदला है, बल्कि कई वस्तुओं को भी इससे बाहर किया है।