गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा
जलवायु परिवर्तन और डेल्टा का संकट
जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, जलस्तर में वृद्धि की चर्चा तो होती है, लेकिन एक नया और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के उपग्रह डेटा ने यह दर्शाया है कि गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र समुद्र के जल स्तर में वृद्धि की तुलना में कहीं अधिक तेजी से धंस रहा है। यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन और भविष्य के बुनियादी ढांचे के लिए भी एक गंभीर खतरा बन चुकी है।
तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा
नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में 2014 से 2023 के बीच 40 प्रमुख नदी डेल्टाओं का विश्लेषण किया गया। इसके परिणाम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के आधे से अधिक डेल्टा हर साल 3 मिलीमीटर से अधिक की दर से धंस रहे हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर समुद्र का जल स्तर लगभग 4 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा है। इन दोनों स्थितियों का संयोजन तटीय क्षेत्रों के लिए भविष्य में विनाशकारी हो सकता है।
गंगा डेल्टा की गंभीर स्थिति
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई है। अध्ययन के दौरान इस क्षेत्र के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से में जमीन धंसने के लक्षण देखे गए हैं। इसका अर्थ है कि यहां की भूमि धीरे-धीरे नीचे की ओर जा रही है। यह केवल एक साधारण पर्यावरणीय परिवर्तन नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो अपनी आजीविका के लिए इस उपजाऊ भूमि पर निर्भर हैं।
भूजल का अत्यधिक उपयोग
भूजल का अत्यधिक दोहन इस समस्या का मुख्य कारण बताया गया है। वैज्ञानिकों ने इसे एक गीले स्पंज के उदाहरण से समझाया है। जब हम स्पंज से सारा पानी निकालते हैं, तो वह सिकुड़ जाता है। इसी तरह, जब कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए जरूरत से ज्यादा पानी निकाला जाता है, तो जमीन का आधार कमजोर हो जाता है और वह धीरे-धीरे धंसने लगती है।
कोलकाता पर खतरा
इस अध्ययन ने कोलकाता जैसे बड़े शहरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में स्थित होने के कारण कोलकाता में तेजी से जमीन धंस रही है। इससे शहर की सड़कों, ऊंची इमारतों और भूमिगत पाइपलाइनों को स्थायी नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मानसून के दौरान समुद्री लहरों और बारिश के कारण बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे लाखों लोग असुरक्षित हो गए हैं।
डेल्टा में रहने वाली जनसंख्या
नदी डेल्टा क्षेत्रों में लगभग 5 प्रतिशत वैश्विक जनसंख्या निवास करती है, जो इस संकट का शिकार हो रही है। यदि भूजल प्रबंधन और टिकाऊ विकास के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ये उपजाऊ क्षेत्र समुद्र में समा सकते हैं। संरक्षण की आधुनिक तकनीकें और जल प्रबंधन अब एकमात्र विकल्प हैं। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है कि वे इस अदृश्य प्राकृतिक आपदा को समय रहते रोकें।