गणतंत्र दिवस 2024: नई दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की तैयारी
गणतंत्र दिवस की भव्य तैयारियां
भारत 26 जनवरी को अपनी 77वीं गणतंत्र दिवस के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है। इस विशेष अवसर पर नई दिल्ली में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं, ताकि समारोह निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। अधिकारियों ने प्रमुख स्थानों पर यातायात में बदलाव, वैकल्पिक मार्गों और विशेष झांकियों की व्यवस्था की है, जो कार्यक्रम की भव्यता और सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी.
राष्ट्रपति भवन का सर्किट-1 रहेगा बंद
राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 जनवरी को एक महत्वपूर्ण घोषणा की कि राष्ट्रपति भवन के सर्किट-1 में आम नागरिकों का प्रवेश 21 से 29 जनवरी तक अस्थायी रूप से बंद रहेगा। यह निर्णय गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह की तैयारी के लिए लिया गया है। इस दौरान आगंतुकों को विजय चौक पर होने वाली परेड के लिए यात्रा की तारीखों में बदलाव करने की सलाह दी गई है.
'कर्तव्य पथ' पर यातायात व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दिन कर्तव्य पथ के आसपास यातायात पर प्रतिबंध लगाए हैं। 26 जनवरी को सुबह 4 बजे से कर्तव्य पथ पर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, ताकि परेड की सुरक्षा और संचालन सुनिश्चित किया जा सके। यात्री वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे उत्तर दिल्ली से दक्षिण दिल्ली जाने के लिए मदर टेरेसा क्रिसेंट मार्ग या मथुरा रोड। पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) निशांत गुप्ता ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण चौराहों और गोल चक्कों पर पुलिस तैनात रहेगी और लोग मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे.
झांकियां विरासत और प्रगति का प्रतीक
गणतंत्र दिवस परेड में कम से कम 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित होंगी, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्रगति को दर्शाएंगी। इस वर्ष की झांकियां दो मुख्य विषयों पर आधारित हैं: "स्वतंत्रता का मंत्र - वंदे मातरम" और "समृद्धि का मंत्र - आत्मनिर्भर भारत।" इनमें से 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी, जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं से होंगी.
राज्य-स्तरीय झांकियों की विशेषताएं
झांकियों में विभिन्न राज्यों की अनूठी संस्कृति और योगदान भी प्रदर्शित होगा। असम ने अपने शिल्प गांव आशीराकंडी को प्रमुखता दी है। वहीं, गुजरात और छत्तीसगढ़ "वंदे मातरम" के स्वतंत्रता संदेश को प्रस्तुत करेंगे। महाराष्ट्र गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित करेगा। ये झांकियां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम होंगी और समारोह की भव्यता में चार चांद लगाएंगी.