गणतंत्र दिवस पर वीवीआईपी कल्चर का अंत: कुर्सियों के नाम होंगे नदियों पर
गणतंत्र दिवस समारोह में बदलाव
गणतंत्र दिवस समारोह में वीवीआईपी कल्चर का अंत
गणतंत्र दिवस के इस वर्ष समारोह में मेहमानों के लिए कुर्सियों पर वीवीआईपी, वीआईपी और डिग्निटी के नाम नहीं होंगे। इसके बजाय, कुर्सियों के नाम नदियों के नाम पर रखे जाएंगे। इसके साथ ही, बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए गैलरी का नाम संगीत वाद्ययंत्रों पर रखा जाएगा। यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया गया है, जो लंबे समय से चल रहे वीआईपी कल्चर को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है।
समानता को बढ़ावा देने का प्रयास
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बदलाव की जानकारी दी। सरकार का मानना है कि इस परिवर्तन से आम नागरिक और वीआईपी के बीच का भेद कम होगा। यह भारतीय संस्कृति, विरासत और समानता को बढ़ावा देने में सहायक होगा, जिससे हर नागरिक को समानता का अनुभव होगा।
गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ 2004 से एक रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी ने इन दोनों नेताओं को समारोह में आमंत्रित किया है।
मुख्य अतिथि का चयन कैसे होता है
भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो पहले मुख्य अतिथि बने थे। अब तक, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के नेताओं को सबसे अधिक 5-5 बार मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड के लिए मुख्य अतिथि का चयन भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और व्यापारिक संबंधों के आधार पर किया जाता है।
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