गर्मी में गिग वर्कर्स की सुरक्षा के लिए सरकार से उठी आवाज
गर्मी के बीच गिग वर्कर्स की स्थिति
नई दिल्ली - गर्मी की तीव्रता बढ़ने के साथ, लोग घरों में रहकर ऑनलाइन ग्रॉसरी और फूड ऑर्डर करने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। इस बीच, डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स को तेज धूप और लू में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ये डिलीवरी पार्टनर्स गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहे हैं, जिसके खिलाफ अब आवाज उठने लगी है।
IFAT की मांगें
इसी संदर्भ में, Indian Federation of App-based Transport Workers (IFAT) ने केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की है। संगठन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा मानकों को लागू करने की मांग की है।
मुख्य मांगें
गर्मी के बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए, IFAT ने कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए हैं:
1. सवेतन कूलिंग ब्रेक: जब India Meteorological Department द्वारा ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी किया जाए, तो हर 2 घंटे के काम के बाद कम से कम 20 मिनट का पेड ब्रेक दिया जाए।
2. पेनल्टी से राहत: गर्मी के कारण काम रोकने या देरी होने पर वर्कर्स की रेटिंग कम न की जाए और उनकी आईडी ब्लॉक न की जाए।
3. जरूरी सुविधाएं: ऐप कंपनियों को पीने का पानी, ORS और कूलिंग सेंटर की जानकारी ऐप में उपलब्ध करानी चाहिए।
4. इमरजेंसी फीचर: ऐप में ‘हीट डिस्ट्रेस’ बटन होना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता मिल सके।
कानूनी प्रावधान की आवश्यकता
संगठन ने Code on Social Security, 2020 के तहत इन सुरक्षा उपायों को लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही, National Disaster Management Authority की मौजूदा एडवाइजरी को अनिवार्य नियमों में बदलने की अपील की गई है।
एल्गोरिदम का दबाव
IFAT के राष्ट्रीय महासचिव Shaik Salauddin का कहना है कि डिलीवरी और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम का दबाव इतना अधिक होता है कि वर्कर्स भीषण गर्मी में भी काम करने को मजबूर रहते हैं। इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए सड़क पर काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए ठोस सुरक्षा उपाय लागू करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। अब यह देखना है कि सरकार इन मांगों पर कब और कितना अमल करती है।