×

गाजियाबाद के हरीश राणा का निधन, 13 वर्षों के दर्द से मिली मुक्ति

गाजियाबाद के हरीश राणा का निधन हो गया, जिन्होंने 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के तहत अंतिम सांस ली। 14 मार्च को एम्स में भर्ती होने के बाद, उनकी इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें पहले उन्हें खाना और फिर पानी देना बंद किया गया। हरीश के माता-पिता ने उनके अंगदान का निर्णय लिया, जिससे अन्य लोगों को जीवन मिल सकेगा। जानें इस संवेदनशील मामले की पूरी कहानी।
 

हरीश राणा का निधन

गाजियाबाद: दिल्ली के एम्स में इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के तहत भर्ती हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया। उन्हें 14 मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया था, और उन्होंने 11वें दिन अंतिम सांस ली। हरीश की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू हुई थी। पहले चरण में उन्हें ट्यूब के माध्यम से दिया जाने वाला खाना बंद किया गया, और दूसरे चरण में पानी देना भी रोक दिया गया। तब से डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रख रहे थे।


गाजियाबाद के 13 वर्षों से कोमा में रहे हरीश राणा को एम्स के आईआरसीएच (इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती किया गया था। उल्लेखनीय है कि 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को निष्क्रिय इच्छामृत्यु के लिए जीवन रक्षक प्रणाली को बंद करने की अनुमति दी थी और उन्हें पैलिएटिव केयर के लिए एम्स में भर्ती करने का निर्देश दिया था।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, एम्स ने डॉक्टरों की एक समिति का गठन किया और उन्हें 14 मार्च को भर्ती किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के शरीर से पोषण देने वाली ट्यूब को निकाला नहीं गया, बल्कि उस पर कैप लगा दिया गया था। इसी तरह पानी देने वाली ट्यूब को भी बंद कर दिया गया था। इस प्रकार, हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।


इसके अलावा, हरीश के माता-पिता ने उनके अंगदान का निर्णय लिया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की। हरीश की मृत्यु के बाद उनके अंगों से अन्य लोगों को जीवन मिल सकेगा। पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर पड़े हरीश ने जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष किया। पूरी प्रक्रिया को दर्द रहित और सामान्य बनाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने निर्देश दिए थे। इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के दूसरे चरण के बाद हरीश से मिलने की अनुमति बंद कर दी गई थी।