गाजियाबाद जेल में शिक्षा का उजाला: 10वीं में 100% और 12वीं में 95% सफलता
गाजियाबाद जेल में शिक्षा का नया अध्याय
गाजियाबाद: जिला कारागार में एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां सलाखों के पीछे शिक्षा की एक नई किरण जल रही है, जो उम्मीद और बदलाव की कहानी बुन रही है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षा की चाह हो, तो कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं बन सकती। गाजियाबाद जेल में हाई स्कूल का परिणाम 100 प्रतिशत रहा, जबकि इंटरमीडिएट में भी बंदियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां 95 प्रतिशत बंदी पास हुए।
जेल की दीवारों के भीतर रहकर भी बंदियों ने अपनी शिक्षा को जारी रखा और उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए। इस सफलता के पीछे जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा द्वारा बनाए गए शैक्षिक माहौल का भी बड़ा योगदान है। गाजियाबाद जेल में बंदियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जेल परिसर में एक लाइब्रेरी भी है, जहां सभी आवश्यक किताबें उपलब्ध हैं। कैदी लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं या किताबें अपने बैरक में भी ले जा सकते हैं। बोर्ड परीक्षाओं से पहले विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं ताकि बंदी बेहतर तैयारी कर सकें।
इंटरमीडिएट में 18 बंदियों ने लिया भाग
जानकारी के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2025-26 में गाजियाबाद जेल से हाई स्कूल की परीक्षा में पांच बंदी शामिल हुए, जिनमें से एक ने फर्स्ट डिवीजन और चार ने सेकंड डिवीजन के साथ परीक्षा पास की। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा में 18 बंदी शामिल हुए, जिनमें से 11 ने सेकंड डिवीजन और 6 ने थर्ड डिवीजन के साथ कुल 17 बंदी पास हुए, जबकि एक बंदी अनुत्तीर्ण रहा।
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने कहा, "हमारा लक्ष्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं है, बल्कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना और समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है। जब कोई बंदी पढ़ाई करता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने भविष्य के प्रति नई सोच विकसित करता है। बंदियों की सफलता अन्य बंदियों के लिए प्रेरणा बनेगी।" जेल प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक बंदी शिक्षा से जुड़ें और अपने समय का सकारात्मक उपयोग करें।
गाजियाबाद जेल में शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न कौशल भी सिखाए जाते हैं। जेल परिसर में कंप्यूटर लैब है, जहां बंदियों को विभिन्न कंप्यूटर कोर्स कराए जाते हैं। इसके अलावा, उन्हें टेलरिंग, हेयर कटिंग, पेंटिंग आदि भी सिखाया जाता है, ताकि वे रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानित व्यक्ति के रूप में स्थापित हो सकें।