गाजियाबाद में जनगणना ड्यूटी से बचने की कोशिश, प्रशासन ने 800 से अधिक आवेदन प्राप्त किए
गाजियाबाद में जनगणना की तैयारियाँ
उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद में 21 मई 2026 से शुरू होने वाली जनगणना 2027 के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है। हालाँकि, अब प्रशासन को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जनगणना ड्यूटी में शामिल 800 से अधिक कर्मचारियों ने स्वास्थ्य, पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए ड्यूटी से छूट की मांग की है। इन आवेदनों की संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे यह निर्धारित करें कि कौन से आवेदन वास्तविक समस्याओं पर आधारित हैं और कौन से कर्मचारी केवल ड्यूटी से बचने के लिए आवेदन कर रहे हैं। प्रशासन सभी मामलों की गंभीरता से जांच कर रहा है ताकि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसके साथ ही, स्वास्थ्य संबंधी मामलों की पुष्टि के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।
जनगणना कार्य के लिए 9,000 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वास्तविक समस्याओं वाले कर्मचारियों को राहत देने पर विचार किया जाएगा, लेकिन बिना उचित कारण ड्यूटी से बचने वालों के खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब प्रशिक्षण सत्रों और मेडिकल जांच के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने में जुटा है।
अपर जिलाधिकारी की टिप्पणी
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सौरव भट्ट ने बताया कि जनगणना ड्यूटी से छूट के लिए 800 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का उल्लेख किया है, जबकि कुछ ने पारिवारिक और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं का हवाला दिया है। प्रशासन किसी भी वास्तविक समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहता है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई कर्मचारी बिना उचित कारण के ड्यूटी से न बच सके। स्वास्थ्य संबंधी मामलों की जांच के लिए जिला प्रशासन ने जिला एमएमजी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। जिन कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी है और जो अस्वस्थता का दावा कर रहे हैं, उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा।
मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच और परीक्षण के बाद ही यह तय किया जाएगा कि संबंधित कर्मचारी वास्तव में ड्यूटी करने में सक्षम हैं या नहीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिन कर्मचारियों की समस्याएँ वास्तविक हैं, उनके आवेदन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जबकि ऐसे कर्मचारी जो केवल ड्यूटी से बचने के लिए आवेदन दे रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 4 और धारा 11 के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जनगणना के लिए अप्रैल के पहले हफ्ते में ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर उन्हें जानकारी दे दी गई थी और प्रशिक्षण सत्र का शेड्यूल भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रशिक्षण सत्र में शामिल नहीं हुए। अब जिला प्रशासन विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर उपस्थित होने का अवसर दे रहा है। यदि इसके बाद भी कर्मचारी प्रशिक्षण सत्र में शामिल नहीं होते हैं, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।