गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग: मुस्लिम संगठनों की नई पहल
गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग
भारत में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठ रही है, और यह मांग हिंदू संगठनों द्वारा नहीं, बल्कि मुस्लिम संगठनों द्वारा की जा रही है। उनका कहना है कि यदि गाय को इस दर्जे में मान्यता दी जाती है, तो इससे गाय के नाम पर होने वाली हिंसा में कमी आएगी और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न भी रुकेगा। विपक्ष और अल्पसंख्यक संगठनों का तर्क है कि जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) गाय पर राजनीति कर रही है और देश के कई राज्यों में उनकी सरकार है, तो फिर गाय को राष्ट्रीय पशु क्यों नहीं बनाया जा रहा है।
राजनीतिक दृष्टिकोण
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यदि बीजेपी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करती है, तो इससे राजनीतिक मुद्दे समाप्त हो जाएंगे और इस पर राजनीति नहीं हो पाएगी। जैसे राम मंदिर के मुद्दे पर अब राजनीति नहीं हो रही है, वैसे ही गाय के मुद्दे पर भी नहीं होगी। विधानसभा चुनावों में गाय अक्सर पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी मुद्दा बन जाती है। अब सवाल यह है कि क्या गाय को राष्ट्रमाता या राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जा सकता है?
लोगों की अपेक्षाएं
मोहम्मद सुहैब, विधायक, RJD:-
गाय केवल एक पशु नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति का आधार है। बिहार विधान परिषद के माध्यम से केंद्र सरकार से अपील है कि गाय को 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा दिया जाए। गाय के नाम पर वोट लेने वाली बीजेपी गो हत्यारों से चंदा ले रही है और गोमांस निर्यात को बढ़ावा दे रही है। इसी पैसे से वह झंडा खरीदती है और सभी जिलों में बीजेपी कार्यालय बनाती है, जबकि गाय के नाम पर बेगुनाह गरीबों का मॉब लिंचिंग करती है।
संविधान में प्रतीकों की मान्यता
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) विशाल अरुण मिश्र ने बताया कि भारत का संविधान शैक्षिक और सैन्य उपाधियों के अलावा किसी अन्य उपाधि की अनुमति नहीं देता। गृह मंत्रालय ने भी कुछ जनहित याचिकाओं के जवाब में यह स्पष्ट किया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 18(1) में कहा गया है कि राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि नहीं देगा। इसलिए राष्ट्रीय पशु, पक्षी, और झंडे के लिए कोई संवैधानिक मान्यता नहीं होती।
राष्ट्रीय प्रतीकों की वैधानिक स्थिति
7 अगस्त 2023 को केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में राष्ट्रीय प्रतीकों की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मोर राष्ट्रीय पक्षी है और बाघ राष्ट्रीय पशु है। इन्हें अधिसूचित किया गया है। मोर और बाघ को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है।
महात्मा गांधी की उपाधि
अक्टूबर 2012 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत एक सवाल के जवाब में कहा था कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि नहीं दी जा सकती, क्योंकि संविधान केवल शैक्षिक और सैन्य उपाधियों की अनुमति देता है। यह जवाब तब आया था जब एक बच्ची ने यह जानकारी मांगी थी।