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गुंडा एक्ट: राज्यों में भिन्नता और पश्चिम बंगाल का नया बिल

भारत में गुंडा एक्ट के लिए कोई केंद्रीय कानून नहीं है, बल्कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कानून लागू हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गुंडा की परिभाषा भिन्न है, जबकि पश्चिम बंगाल का नया बिल इस विषय पर चर्चा में है। राष्ट्रपति ने इस बिल को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा है, जिससे कानून की प्रक्रिया में और जटिलता आ गई है। जानिए गुंडा एक्ट की परिभाषा और इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में।
 

गुंडा एक्ट का केंद्रीय कानून का अभाव

भारत में गुंडा एक्ट के रूप में कोई एकीकृत केंद्रीय कानून नहीं है। विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और आदतन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। उत्तर प्रदेश में 1970 से और राजस्थान में 1975 से गुंडा एक्ट लागू है। अब पश्चिम बंगाल का 2026 का पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल भी इसी प्रकार की व्यवस्था पर चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि यह अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे 25 सितंबर को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है।


गुंडा की परिभाषा: उत्तर प्रदेश और राजस्थान

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 2(b) के अनुसार, 'गुंडा' वह व्यक्ति है जो अकेले या किसी गैंग के सदस्य के रूप में बार-बार अपराध करता है या उसमें सहायता करता है। इसमें IPC की कुछ धाराएं और अनैतिक व्यापार रोकथाम कानून, 1956 के तहत दोषी व्यक्ति भी शामिल हैं। महिलाओं या लड़कियों से छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति भी इस श्रेणी में आते हैं।


राजस्थान: राजस्थान गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1975 की धारा 2(बी) के अनुसार, बार-बार अपराध करने वाला व्यक्ति 'गुंडा' माना जा सकता है। इसमें अकेले या गिरोह के सदस्य के रूप में अपराध करने वाले लोग शामिल हैं। महिलाओं से छेड़छाड़, लोगों को डराने-धमकाने और जबरन चंदा वसूलने जैसे मामलों में शामिल व्यक्ति भी इसके दायरे में आते हैं।


बंगाल के नए बिल में गुंडा की परिभाषा

पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 की धारा 2(d) में गुंडा उस व्यक्ति को माना जाएगा जो अकेले या किसी समूह के सदस्य के रूप में लगातार असामाजिक गतिविधियों में संलग्न है। इसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 या 112 के तहत चार्जशीट दाखिल होने वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।


बंगाल बिल को राष्ट्रपति द्वारा वापस क्यों किया गया?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 सितंबर को इस बिल को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा है। केंद्र सरकार की आपत्ति बिल की धारा 2(d)(iii)(B) को लेकर है, जिसमें NDPS Act, 1985 के तहत अपराध करने वाले व्यक्ति को 'गुंडा' की परिभाषा में शामिल किया गया है। केंद्र का कहना है कि यह प्रावधान पहले से मौजूद निवारक हिरासत की व्यवस्था से टकरा सकता है।