गुजरात के कच्छ में भूकंप के झटके, जान-माल का कोई नुकसान नहीं
गुजरात में भूकंप के झटके
नई दिल्ली: कच्छ जिले में गुरुवार दोपहर को दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में थोड़ी चिंता उत्पन्न हुई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, ये झटके केवल तीन मिनट के अंतराल पर आए। राहत की बात यह है कि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। कच्छ को पहले से ही देश के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है, इसलिए यहां भूकंपों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
भूकंप की तीव्रता और केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, पहला झटका दोपहर 2:20 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 थी। इसका केंद्र खावड़ा से लगभग 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। इसके तीन मिनट बाद, 2:23 बजे, दूसरा झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.2 थी और इसका केंद्र धोलावीरा से लगभग 32 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर दिशा में था।
जान-माल के नुकसान की रिपोर्ट नहीं
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, दोनों भूकंप हल्के थे और इनके कारण किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई जानकारी नहीं मिली। हालांकि, झटके महसूस होते ही कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखी और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी।
कच्छ की भूकंपीय संवेदनशीलता
कच्छ भारत के उन क्षेत्रों में से एक है जहां भूकंप के झटके समय-समय पर आते रहते हैं। यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। 2001 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद से यहां लगातार निगरानी रखी जाती है और छोटे झटकों को भी गंभीरता से लिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के भूकंप इस क्षेत्र में असामान्य नहीं हैं।
अन्य राज्यों में भूकंप के झटके
कच्छ से पहले, 14 जुलाई की रात जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में 3.6 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके अलावा, 9 जुलाई को महाराष्ट्र के नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भी हल्के झटके महसूस किए गए थे। इन घटनाओं में भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन लोगों में थोड़ी दहशत का माहौल बना रहा।
अफगानिस्तान में भूकंप का प्रभाव
इससे पहले, 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया था। इसका केंद्र जमीन के लगभग 215 किलोमीटर नीचे था, जिसके कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्सों, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक महसूस किए गए। गहराई अधिक होने के कारण इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्र में देखा गया।