गुजरात के संदेशरा बंधुओं का बैंकों के साथ समझौता: 51 सौ करोड़ में निपटा मामला
संदेशरा बंधुओं का बैंकों के साथ क्लेम सेटलमेंट
गुजरात के संदेशरा बंधुओं का बैंकों के साथ समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष के अंत में इस समझौते को मंजूरी दी थी। जानकारी के अनुसार, नितिन और चेतन संदेशरा के बीच जांच एजेंसियों और कर्ज देने वाले बैंकों के साथ सहमति बनी कि 51 सौ करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसे फुल एंड फाइनल सेटलमेंट मानते हुए संदेशरा बंधुओं के खिलाफ बैंक घोटाले, धोखाधड़ी और लोन डिफॉल्ट जैसे सभी आपराधिक मामलों को समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। इस प्रकार, स्टर्लिंग बायोटेक का मामला 51 सौ करोड़ रुपए में सुलझ गया है।
हालांकि, समस्या यह है कि स्टर्लिंग बायोटेक पर बैंकों का बकाया लगभग 19 हजार चार सौ करोड़ रुपए है। सोचने वाली बात है कि डिफॉल्ट की राशि के एक चौथाई के बराबर रकम को फुल एंड फाइनल मानकर सभी आपराधिक आरोप समाप्त कर दिए गए हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि बैंकों के लिए इस समझौते को स्वीकार करना बेहद कठिन था। इसके विपरीत, कर्नाटक के कारोबारी विजय माल्या का मामला देखें, जो देश छोड़कर भाग गए थे। विजय माल्या पर छह हजार करोड़ रुपए से अधिक का डिफॉल्ट था, लेकिन उन्होंने बैंकों के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की थी। उनकी विमानन कंपनी घाटे में चल रही थी, जिसके कारण वे समय पर कर्ज चुकता नहीं कर सके। गिरफ्तारी के डर से वे भाग गए और तब से वे भगोड़ा कारोबारी माने जाते हैं। एजेंसियों ने उनसे 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की है। इस प्रकार, एक कारोबारी का 19 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज 5 हजार करोड़ में सेटल हो रहा है, जबकि दूसरे का 6 हजार करोड़ का कर्ज 14 हजार करोड़ में भी सेटल नहीं हो पा रहा है।