गुरमीत राम रहीम की कानूनी मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट ने फिर से उठाई आवाज
नई दिल्ली में कानूनी जंग
नई दिल्ली: साध्वी यौन शोषण और पत्रकार हत्याकांड में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की कानूनी समस्याएं एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उन्हें बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अब सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मृतक पत्रकार के परिवार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए राम रहीम और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर आठ हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है। इस कदम से हाईकोर्ट के निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं और इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी पेच फिर से उलझता दिख रहा है।
CBI की भूमिका पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने सर्वोच्च अदालत में कोई अपील नहीं की। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने CBI और राम रहीम से स्पष्टीकरण मांगा है।
अगली सुनवाई पर सबकी नजरें
अब सभी की नजरें नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि क्या हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रहेगा या राम रहीम को फिर से इस गंभीर हत्या के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
2002 का खौफनाक दिन
सच्चाई को बेबाकी से उजागर करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार अपराधियों ने गोलियों से भून दिया था। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए, उन्होंने 21 नवंबर 2002 को अंतिम सांस ली। इसके बाद पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए एक लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसकी जांच बाद में CBI को सौंपी गई। पंचकूला स्थित विशेष CBI अदालत ने वर्षों की जांच के बाद जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
यह मामला 2002 में वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की निर्मम हत्या से संबंधित है। मार्च 2026 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए राम रहीम को इस हत्याकांड से बरी कर दिया और निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के तीन अन्य सह-आरोपियों की सजा को बरकरार रखा। रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान जस्टिस की पीठ ने इस संवेदनशील मामले में कानूनी विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया और आगामी सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह की तारीख तय की है।