×

गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा-6 में कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह

गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा-6 का आयोजन उत्तर प्रदेश में हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं का सम्मान किया। इस समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. कृष्ण गोपाल ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य यात्रा की उपलब्धियों और समाज सेवा के महत्व पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जनजातियों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया। जानें इस कार्यक्रम की अन्य महत्वपूर्ण बातें और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के बारे में।
 

कार्यक्रम का आयोजन

उत्तर प्रदेश: गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास और नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (एनएमओ) द्वारा मंगलवार को गोमतीनगर विस्तार में सीएमएस में गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा 6 के अवसर पर कार्यकर्ता सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल मुख्य वक्ता थे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अध्यक्षता की। अतिथियों ने भारत माता, भगवान धनवंतरि, स्वामी विवेकानंद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्वलन किया।


मुख्यमंत्री का संबोधन

कार्यक्रम का संचालन डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किया। स्वास्थ्य यात्रा का विस्तृत विवरण कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. एमएलवी भट्ट ने प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल नारों से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने से होती है। उन्होंने भारत-नेपाल मैत्री को मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों में समाज को जोड़ने वाले स्वयंसेवी संगठनों की सराहना की।


स्वास्थ्य यात्रा का महत्व

स्वास्थ्य यात्रा चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। इस यात्रा ने सीमावर्ती 7 जनपदों के जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचकर उन लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिन्हें अन्यथा कोई नहीं पूछता।


सीमावर्ती जनजातियों की स्थिति

सीएम योगी ने 2007-08 में नेपाल की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि थारू जनजाति के लोगों ने स्वाभिमान के साथ सीमा पर डटे रहने की बात कही। उनकी कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने उनके गांवों में विकास, मकान, बिजली, सोलर पैनल, स्वास्थ्य और राशन कार्ड उपलब्ध कराए। इसी तरह प्रदेश के वनवासी समाज के लिए भी कार्य किए गए हैं।


स्वास्थ्य यात्रा की सफलता

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य यात्रा ने 23 हजार मरीजों से शुरू होकर अब 2 लाख 66 हजार लोगों तक पहुंच बनाई है। चिकित्सकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि ओपीडी को सीमित न रखें, बल्कि फील्ड में जाकर देखें कि बीमारी जियोग्राफी और जलवायु से भी प्रभावित होती है। उन्होंने चिकित्सकों से अनुरोध किया कि वे महीने में एक रविवार को सेवा कार्य के लिए समय निकालें और इस अभियान को आंदोलन का रूप दें।


समाज की जागरूकता

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि जब समाज अपने दुख को देखकर खुद खड़ा हो जाता है, तो यह जागृति का संकेत है। एनएमओ के माध्यम से मेडिकल छात्र और शिक्षक देशभर में सेवा कर रहे हैं। 1999 से वनवासी क्षेत्रों में धनवंतरि यात्रा शुरू हुई और 2004 से असम में यह अभियान चल रहा है।


सेवा का धर्म

उन्होंने जोर दिया कि पूरा देश हमारा है और सीमाओं पर रहने वाले लोगों की सेवा करना हमारा धर्म है। दिल्ली की कुछ बस्तियों में महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने का संकल्प भी लिया गया है।


सम्मान समारोह

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सेवा भाव पर निर्भर करती है, संसाधनों पर नहीं। समाज ने चिकित्सकों को जो दिया, उसे वापस लौटाना चाहिए। प्रो. रज्जू भैया के हवाले से उन्होंने कहा कि सरकार सहयोगी हो सकती है, लेकिन परिवर्तन समाज की जागरूकता से ही होगा। एनएमओ के वरिष्ठ सदस्यों ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।


उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक कौशल, मंत्री दयाशंकर सिंह, आरएमएल निदेशक सीएम सिंह, अपर्णा यादव, अवनीश अवस्थी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।