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गुरुग्राम में गोपाल कांडा के ठिकानों पर ED की छापेमारी: वाटिका लिमिटेड मामले की जांच जारी

हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई वाटिका लिमिटेड से जुड़े निवेशक धोखाधड़ी मामले में की गई है, जिसमें आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों से पैसे लेकर प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए। ED की जांच में कई संपत्तियों को अटैच किया गया है और अब एजेंसी वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है। जानें इस मामले में और क्या हो रहा है और निवेशकों को क्या उम्मीदें हैं।
 

गुरुग्राम में ED की कार्रवाई


गुरुग्राम में ED की छापेमारी: हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में छापेमारी की। यह कार्रवाई वाटिका लिमिटेड से जुड़े निवेशक धोखाधड़ी मामले के संदर्भ में की गई है। ED की जांच उस मामले से संबंधित है जिसमें वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर्स पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों से पैसे लेकर प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए और वादे के अनुसार रिटर्न नहीं दिया। जांच के अनुसार, चार कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में लगभग 659 निवेशकों से करीब 248 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। निवेशकों को प्रोजेक्ट में यूनिट देने, एश्योर्ड रिटर्न और लीज रेंटल जैसी सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था।


निवेशकों को नहीं मिला लाभ

आरोप है कि कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए और निवेशकों को उनकी संपत्तियों की कन्वेयंस डीड भी नहीं मिली। ED ने 25 अगस्त को भी गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने दिल्ली-NCR में वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर से जुड़े सात रिहायशी और कारोबारी परिसरों पर PMLA के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। इसके अलावा, लगभग 33 करोड़ रुपये मूल्य की तीन लग्जरी गाड़ियां, ज्वेलरी और बैंक खातों/सिक्योरिटीज को जब्त या फ्रीज किया गया था।


पहले भी संपत्तियों पर कार्रवाई

ED ने इस मामले में पहले भी संपत्तियों पर कार्रवाई की है। नवंबर 2025 में करीब 108 करोड़ रुपये की कीमत वाले 1.35 एकड़ के कमर्शियल प्लॉट को अटैच किया गया था। इससे पहले जनवरी 2025 में लगभग 68.59 करोड़ रुपये की नौ अचल संपत्तियां अटैच की गई थीं। वाटिका मामले में ED की कार्रवाई के दौरान अब तक बड़ी कीमत की संपत्तियों पर कार्रवाई हो चुकी है। आरोपों के अनुसार, निवेशकों को वाटिका के विभिन्न कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में निवेश के बदले समय पर कब्जा, एश्योर्ड रिटर्न, लीज रेंटल और सेल/कन्वेयंस डीड जैसी सुविधाओं का भरोसा दिया गया था।


ED की जांच का दायरा

मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ED आमतौर पर यह पता लगाने की कोशिश करती है कि अपराध से प्राप्त रकम कहां गई और उसका उपयोग किन संपत्तियों या संस्थाओं में हुआ। वाटिका मामले में भी एजेंसी वित्तीय लेन-देन, कंपनियों और संबंधित पक्षों के बीच पैसों के प्रवाह की जांच कर रही है। अगस्त की तलाशी में जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। एजेंसी यह भी देखेगी कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का उपयोग कहां हुआ और क्या किसी प्रकार की मनी लॉन्ड्रिंग हुई।