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गुरुग्राम में बारिश के बाद जलभराव: प्रशासन की तैयारियों की पोल खुली

गुरुग्राम में हालिया बारिश ने एक बार फिर जलभराव की गंभीर समस्या को उजागर किया है। प्रशासन ने बारिश से पहले सुधार कार्यों के बड़े दावे किए थे, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। सड़कें तालाबों में बदल गई हैं और नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानिए इस संकट के पीछे की असलियत और प्रशासन की तैयारियों की पोल कैसे खुली।
 

गुरुग्राम में बारिश के बाद जलभराव की समस्या


गुरुग्राम में बारिश के बाद जलभराव: गुरुग्राम, जिसे देश की मिलेनियम सिटी कहा जाता है, में कई बड़ी कंपनियों के कार्यालय और ऊंची इमारतें हैं। यहां के विकास के दावे भले ही बड़े हों, लेकिन बारिश के दौरान सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। कुछ घंटों की बारिश के बाद, शहर का चेहरा बदल जाता है। अंडरपास तालाब में तब्दील हो जाते हैं, और लोग कमर तक पानी में चलने को मजबूर होते हैं। हर साल मानसून के दौरान यह स्थिति एक रिपोर्ट कार्ड बन जाती है, जिसमें 'FAIL' लिखा होता है।


बारिश से पहले प्रशासन की तैयारियों का दावा

दिलचस्प बात यह है कि बारिश से पहले प्रशासन बड़े दावे करता है। जून में हरियाणा सरकार ने कहा था कि 158 जलभराव वाले स्थानों पर सुधार कार्य पूरा कर लिया गया है। लेकिन जब बारिश आई, तो वही पुरानी तस्वीरें लौट आईं। सवाल यह है कि क्या वास्तव में काम हुआ था या सब कुछ कागजों पर था?


सड़कें और तालाब में फर्क करना मुश्किल

गुरुग्राम के कई क्षेत्रों में बारिश के बाद सड़कें तालाबों में बदल जाती हैं। सेक्टर-10 में स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें घुटनों तक पानी में चलना पड़ता है। यहां के नागरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे खराब सड़कें और खुले मैनहोल।


बादशाहपुर ड्रेन की स्थिति

गुरुग्राम के जलभराव की असली तस्वीर बादशाहपुर ड्रेन में देखने को मिलती है, जहां कचरे और गाद का जमाव है। इससे पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है।


सड़कें करोड़ों की, लेकिन जलभराव की समस्या

गुरुग्राम में बड़े-बड़े फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे बनते हैं, लेकिन बारिश के बाद जलभराव की समस्या बनी रहती है। सेक्टर 102-102A की सड़क पर 11.8 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया, फिर भी जलभराव जारी रहा।


जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी

यह संकट केवल अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है। गुरुग्राम के जनप्रतिनिधियों से भी सवाल पूछे जाने चाहिए। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री से जलभराव की समस्या पर चर्चा की है।


प्रशासन की तैयारियों पर सवाल

प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए हेल्पलाइन शुरू की है, लेकिन नागरिकों का असली सवाल है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद पानी कब निकलेगा? नागरिकों को सूखी सड़कें चाहिए, न कि हेल्पलाइन।


गुरुग्राम की विडंबना

गुरुग्राम की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आर्थिक विकास के बावजूद जलनिकासी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। हर बारिश के बाद वही दृश्य, और फिर कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाता है।