गुरुग्राम में युवराज मनचंदा हत्या मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर
पुलिस की लापरवाही का मामला
गुरुग्राम में दिल्ली निवासी युवराज मनचंदा के हत्या मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। शव मिलने के चार दिन बाद पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया और दो दिन बाद जिपनेट (ZIPNET) पर जानकारी अपडेट की। यदि यह जानकारी पहले दी जाती, तो युवराज का शव अंतिम संस्कार से पहले उसके परिवार को मिल जाता, ऐसा आरोप उसके दोस्त और वकील रजत जैन ने लगाया है।
युवराज का लापता होना
रजत जैन ने बताया कि युवराज 6 सितंबर को घर नहीं लौटे और न ही उन्होंने किसी को फोन किया, जो कि पहले कभी नहीं हुआ था। जब उन्होंने युवराज से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका फोन बंद मिला। रजत ने बताया कि युवराज अपनी शादी के लिए शेरवानी खरीदने निकले थे और उनकी बहन भी उनके साथ थी। उन्होंने कहा कि वे एक क्लाइंट से मिलने जा रहे हैं। रजत ने यह भी बताया कि युवराज अडानी रियल्टी में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत थे।
अंतिम संस्कार की तारीख
14 सितंबर को अंतिम संस्कार
रजत ने कहा कि जब लाजपत नगर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, तो उसने बताया कि शव को बादशाहपुर में फेंका गया था। जब हमने बादशाहपुर पुलिस से पूछा, तो हमें पता चला कि शव पहले ही मिल चुका था और पुलिस ने 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
जिपनेट पर जानकारी का विलंब
जिपनेट पर जानकारी का विलंब
रजत ने आगे कहा, 'हमने पूछा कि उन्होंने जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (ZIPNET) पर जानकारी क्यों नहीं डाली? यदि ऐसा किया गया होता, तो हमें शव मिल जाता। युवराज के बारे में जो जानकारी दी गई, उसमें कहा गया कि शव 10 सितंबर को मिला और 14 सितंबर को उसका निपटारा कर दिया गया, जबकि 16 सितंबर को ZIPNET पर जानकारी डाली गई।'
मामले का संक्षिप्त विवरण
क्या है पूरा मामला
युवराज सिंह मनचंदा दक्षिण पूर्वी दिल्ली के सरिता विहार के निवासी थे और 6 सितंबर से लापता थे। उनकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, युवराज अपनी बहन के साथ शॉपिंग करने गए थे और बाद में उन्होंने कहा कि वे किसी से मिलने जा रहे हैं। जब वह देर रात तक घर नहीं लौटे, तो परिवार ने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद मिला।
पुलिस ने जांच में पाया कि युवराज ने आखिरी कॉल अपनी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स को किया था। बाद में आन्या का नंबर भी बंद मिला, जिससे पुलिस का शक बढ़ गया। दिल्ली पुलिस ने आन्या की निगरानी बढ़ाई और उसे उत्तराखंड में पकड़ लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल की और बताया कि शव को गुरुग्राम में एक नाले में फेंका गया था।