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गॉडजिला अल नीनो: भारत में सूखे का खतरा बढ़ा

गॉडजिला अल नीनो के आगमन ने भारत में सूखे का खतरा बढ़ा दिया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह अल नीनो पिछले कुछ दशकों का सबसे प्रभावशाली हो सकता है। समुद्र में गर्म पानी का संचय और जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की स्थिति चिंताजनक हो गई है। जानें इसके प्रभाव और संभावित परिणामों के बारे में इस लेख में।
 

समुद्र की गर्मी से मानसून पर असर


गर्मी और कमजोर मानसून का खतरा
गॉडजिला अल नीनो ने भारत में दस्तक दे दी है, जिससे मानसून की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल का अल नीनो अत्यधिक गंभीर हो सकता है, जिसका प्रभाव अगले वर्ष तक महसूस किया जा सकता है। भारत में लाखों लोग अपनी आजीविका के लिए मानसून पर निर्भर हैं, और ऐसे में सूखे का खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है।


1997 जैसी स्थिति का निर्माण

नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अनुसार, पश्चिमी प्रशांत महासागर में 1997 के बाद से ऐसी परिस्थितियाँ बन रही हैं। 29 वर्ष पहले, एक शक्तिशाली अल नीनो का अनुभव हुआ था, जिसे सुपर या गॉडजिला अल नीनो कहा गया। वर्तमान में, जून 2026 में ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले कुछ दशकों का सबसे प्रभावशाली अल नीनो हो सकता है।


समुद्र में गर्म पानी का संचय

नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में समुद्र का जलस्तर सामान्य से अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकेत करता है कि समुद्र की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है। जब समुद्र का पानी गर्म होता है, तो वह फैलने लगता है, जिससे जलस्तर बढ़ जाता है।


समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ता है

समुद्र के भीतर केल्विन वेव्स नाम की विशाल जल-तरंगें गर्मी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रही हैं। जब प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाएं कमजोर होती हैं, तब इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास जमा गर्म पानी पूर्व की ओर दक्षिण अमेरिका के तटों की तरफ बढ़ने लगता है। इससे समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जो अल नीनो की पहचान मानी जाती है।


दुनियाभर में सूखे और बाढ़ की आशंका

वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी प्रशांत महासागर अभी 1997 जितना गर्म नहीं हुआ है, लेकिन नई केल्विन वेव्स लगातार उस क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है। इतिहास बताता है कि अल नीनो के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और एशिया के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन सकती है।


अल नीनो की आधिकारिक घोषणा

अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने 11 जून को अल नीनो की स्थिति की घोषणा की थी। यह घोषणा मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में लगातार कई महीनों तक सामान्य से अधिक तापमान दर्ज होने के बाद की गई।