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गोंडा में सांप पकड़ने वाले सपेरे की कोबरा के डसने से मौत

गोंडा जिले में एक अनुभवी सपेरे रामलखन ने कोबरा को पकड़ने के दौरान अपनी जान गंवा दी। उन्होंने अपनी बहादुरी से सांप को काबू में किया, लेकिन जहरीले डसने के बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक दुखद क्षण है। जानें इस साहसी व्यक्ति की कहानी और उनकी अंतिम क्षणों की बहादुरी।
 

गोंडा में एक साहसी सपेरे की दुखद कहानी

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सभी को भावुक कर दिया है। 40 से 45 वर्षों से जहरीले सांपों को पकड़ने वाले अनुभवी सपेरे रामलखन ने अपनी जान की परवाह किए बिना पहले कोबरा को काबू किया, ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुंचा सके। लेकिन दुर्भाग्यवश, जहरीले कोबरा के डसने के बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। गोंडा जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र के शीर बनकट गांव के 65 वर्षीय रामलखन का परिवार कई पीढ़ियों से सांप पकड़ने का काम करता आ रहा था। रामलखन को जहरीले और खतरनाक सांपों को पकड़ने का लगभग चार दशकों का अनुभव था। जब भी क्षेत्र में सांप निकलने की सूचना मिलती थी, लोग सबसे पहले उन्हें ही बुलाते थे। यही काम उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन भी था।


कोबरा पकड़ने के लिए पहुंचे रामलखन

रविवार को धानेपुर बाजार में एक घर में कोबरा सांप निकलने की सूचना मिलने पर रामलखन मौके पर पहुंचे। उन्होंने सावधानी से कोबरा को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान जहरीले कोबरा ने उन्हें डस लिया। सांप का जहर तेजी से उनके शरीर में फैलने लगा, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कोबरा के डसने के बावजूद रामलखन ने पहले उस सांप को पूरी तरह काबू में किया और उसे सुरक्षित तरीके से एक बोरे में बंद कर दिया। उनका उद्देश्य केवल इतना था कि वह जहरीला सांप किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान न पहुंचा सके। उनकी इस बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की अब हर जगह चर्चा हो रही है।


जिंदा कोबरा के साथ अस्पताल पहुंचे परिजन

सांप को बोरे में बंद करने के बाद परिजन रामलखन को उसी कोबरा के साथ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि जब अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों को पता चला कि मरीज के साथ एक जिंदा कोबरा भी लाया गया है, तो वे भी हैरान रह गए। हालांकि, डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उनका इलाज शुरू किया और उन्हें एंटी स्नेक वेनम समेत जरूरी दवाएं दीं।


जिंदा कोबरा के साथ अस्पताल पहुंचे परिजन.


गोंडा मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल तिवारी के अनुसार, रामलखन को अस्पताल लाए जाने तक सांप का जहर उनके शरीर में काफी फैल चुका था। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। रामलखन की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह न केवल एक अनुभवी सपेरा थे, बल्कि बेहद निडर और जिम्मेदार इंसान भी थे। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक दूसरों की सुरक्षा को अपनी जान से ज्यादा महत्व दिया, जो उन्हें हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रखेगा।