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गोरखपुर में 12 वर्षीय बच्चे द्वारा 9 महीने की भांजी के साथ बलात्कार का मामला

गोरखपुर में एक 12 वर्षीय लड़के ने अपनी 9 महीने की भांजी के साथ दुष्कर्म किया, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया। बच्ची की खोज के दौरान उसे गंभीर हालत में पाया गया। नाबालिग ने अपराध स्वीकार कर लिया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका ट्रायल जुवेनाइल कोर्ट में होगा। जानें इस मामले में क्या हो सकता है और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत क्या प्रावधान हैं।
 

गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक 12 वर्षीय लड़के ने अपनी 9 महीने की भांजी के साथ बलात्कार किया। यह घटना तब हुई जब बच्ची अपनी मां के साथ सो रही थी। रात करीब 12 बजे, नाबालिग ने बच्ची को उठाया और खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया, फिर उसे वहीं छोड़ दिया। सुबह जब मां ने अपनी बेटी को खोजा, तो वह वहां नहीं थी। परिवार ने पूरे गांव में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन किसी को भी इस बारे में कुछ नहीं पता था।


बच्ची की खोज और उसकी हालत

जब लोग बच्ची की तलाश कर रहे थे, तब वह एक खेत में बेसुध पड़ी मिली। उसके चारों ओर खून बिखरा हुआ था और उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई। मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। पुलिस ने गांव के CCTV फुटेज की जांच की, जिसमें नाबालिग के खिलाफ कई सबूत मिले।


नाबालिग पर शक और उसकी कबूलियत

जब नाबालिग से उसकी बहन ने सवाल किया, तो उसने गोलमोल जवाब दिए, जिससे पुलिस को उस पर शक हुआ। एक हफ्ते पहले वह अपने गांव लौटा था। पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद, उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और बताया कि वह शराब के नशे में था।


घटना के समय का नाटक

12 वर्षीय लड़का इतना चालाक था कि जब परिवार बच्ची की तलाश कर रहा था, वह उनकी मदद करने का नाटक कर रहा था। उसने किसी को भी यह नहीं बताया कि उसने क्या किया है। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो उसने बताया कि बच्ची चीख रही थी और वह डरकर वहां से भाग गया।


कानूनी प्रक्रिया और संभावित परिणाम

इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और मामला जुवेनाइल कोर्ट में जाएगा। नाबालिग को सुधार गृह भेजा जा सकता है, क्योंकि भारतीय कानून के अनुसार, उसे सजा की बजाय सुधार की आवश्यकता है।


क्या होगा अगर बच्चा अपराध करे?

एक अन्य वकील ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 34 के अनुसार, यदि कोई बच्चा अपराध करता है, तो उसका ट्रायल जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के अनुसार होगा।


बच्चे की उम्र का निर्धारण

यदि कोर्ट में यह सवाल उठता है कि आरोपी बच्चा है या नहीं, तो विशेष कोर्ट उसकी उम्र का निर्धारण करेगी।


क्या होना चाहिए?

एक वकील ने कहा कि आरोपी के फोन में पोर्नोग्राफी पाई गई है और उसे शराब पीने की आदत थी। उसे अपने अपराध का ज्ञान था, इसलिए उसका ट्रायल वयस्कों की तरह होना चाहिए।


जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सीमाएं

सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बताया कि 12 साल के बच्चे का ट्रायल वयस्कों की तरह नहीं किया जा सकता है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 15 के अनुसार, केवल 16 से 18 वर्ष के किशोरों का ट्रायल वयस्कों की तरह किया जा सकता है।


न्याय की प्राप्ति

दिल्ली हाई कोर्ट की एक अधिवक्ता ने कहा कि बच्चों के अपराधों में न्याय का मतलब हमेशा सजा नहीं होता, बल्कि सुधार भी होता है।


जुवेनाइल बोर्ड की शक्तियां

जुवेनाइल बोर्ड बच्चे को सलाह देकर या चेतावनी देकर घर भेज सकता है। वह उसे सामुदायिक सेवा के लिए भी भेज सकता है।


अधिकतम सजा

जुवेनाइल एक्ट की धारा 18 के अनुसार, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यह तय करेगा कि बच्चे को सुधार और देखभाल की आवश्यकता है या नहीं।