गोरखपुर में दुर्गा पूजा प्रसाद से रेबीज का खतरा, 450 ग्रामीणों का टीकाकरण
गांव में प्रसाद को लेकर चिंता
वायरल समाचार: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के डाड़ी गांव में दुर्गा पूजा के प्रसाद को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल बन गया है। जिस गाय के दूध से प्रसाद तैयार किया गया था, वह बीमार होकर मर गई। पशु चिकित्सक ने गाय में रेबीज की संभावना जताई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीकाकरण शिविर का आयोजन किया। इस दौरान 450 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई।
दुर्गा पूजा का आयोजन और गाय की बीमारी
जानकारी के अनुसार, डाड़ी चौराहे पर नवयुवक मंगल दल समिति द्वारा दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया था। सप्तमी के दिन गांव के एक व्यक्ति के घर से गाय का दूध लाकर प्रसाद बनाया गया, जो कुछ चाय की दुकानों तक भी पहुंचा।
गाय की बीमारी और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने बताया कि 19 अक्टूबर को गाय ने खाना-पीना छोड़ दिया और उसके मुंह से लार गिरने लगी। पशुपालक उसे राजकीय पशु चिकित्सालय ले गए, जहां पशु चिकित्सक ने रेबीज की आशंका जताई। इलाज के बावजूद गाय की मृत्यु हो गई।
टीकाकरण अभियान और स्वास्थ्य विभाग की अपील
गोरखपुर: गाय को कुत्ते ने काटा, गाय की मौत हो गई। जैसे ही गाय की मृत्यु की खबर गांव में फैली लोगों ने सरकारी अस्पताल की तरफ दौड़ लगा दी।
"मसला बड़ा दिलचस्प है"
जिस गाय को कुत्ते ने काटा था, उसी गाय के दूध से चरणामृत बनाया गया था। चरणामृत का सेवन गांव के लोगों ने किया था। जैसे ही लोगों को गाय की मौत होने की खबर मिली हड़कम्प मच गया। लोग डॉक्टर के पास पहुंचे और एन्टी रैबीज वैक्सीन लगवाई। अब तक 450 ग्रामीणों को एन्टी रैबीज लगाई जा चुकी है।
ये घटना गोला ब्लॉक के डाड़ी खास गांव की है।
— Shahnawaz(News24) (@Shahnawazreport) October 22, 2026
गाय की मौत की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से टीकाकरण शिविर लगाने की मांग की। इसके बाद गांव में अभियान चलाया गया। मंगलवार को 50 और बुधवार को 400 लोगों को एंटी रेबीज टीका लगाया गया।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
सीएचसी प्रभारी डॉ. अमरेंद्र ठाकुर ने संभावित संपर्क में आए लोगों से चिकित्सकीय सलाह लेने और डॉक्टर के निर्देशानुसार टीके की सभी निर्धारित खुराक समय पर लेने की अपील की। एसडीएम मनीष कुमार ने भी स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।
गाय का पोस्टमार्टम न होना
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गाय का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया, जिससे रेबीज संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। फिलहाल ग्रामीणों को सतर्क रहने और किसी भी संभावित संपर्क की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह दी गई है।