गोरखपुर लोन धोखाधड़ी मामले में गरिमा सिंह के खिलाफ नई शिकायतें दर्ज
गोरखपुर में लोन धोखाधड़ी का मामला
गोरखपुर। करोड़ों रुपये की लोन धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी गरिमा सिंह और उसके गिरोह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस को छह नई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिसके बाद जांच का दायरा और विस्तृत किया गया है। पुलिस इन नए प्रार्थनापत्रों के रिकॉर्ड और बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है, जिससे गिरोह के खिलाफ नए मुकदमे दर्ज होने की संभावना है।
पहले से दर्ज एफआईआर और नए मुकदमे
सूत्रों के अनुसार, एम्स और सहजनवां थानों में गरिमा सिंह, उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह और अन्य गिरोह के सदस्यों के खिलाफ पहले से चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हाल ही में छह और पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क कर गरिमा के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस सभी मामलों में बैंक ट्रांजैक्शन, लोन के दस्तावेज और पैसों के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है। साक्ष्यों की पुष्टि होते ही इन मामलों को भी मुख्य विवेचना में शामिल किया जाएगा।
पशु चिकित्सक की आत्महत्या और रेलवे अधिकारी से ठगी
इस गिरोह का शिकार हुए पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह ने लगभग 1.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। पुलिस इस मामले को आत्महत्या के उकसावे और धोखाधड़ी से जोड़कर देख रही है। इसके अलावा, रेलवे अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह से भी गिरोह द्वारा ठगी की गई है। जांच में पता चला है कि गरिमा का नेटवर्क केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि कुशीनगर और आसपास के अन्य जिलों में भी फैला हुआ था।
बैंक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पीड़ितों के बयान के बाद, लोन देने वाले बैंकों के अधिकारी और एजेंट भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि एक ही व्यक्ति के दस्तावेजों पर एक साथ पांच से छह अलग-अलग बैंकों से करोड़ों रुपये का व्यक्तिगत लोन कैसे पास किया गया। इसके साथ ही, विभागीय स्तर पर लोन पास करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
गरिमा की डायरी से खुला 100 करोड़ का लक्ष्य
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को गरिमा के पास से एक डायरी मिली, जिसमें उसने 2026 तक अरबपति बनने और 100 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य लिखा था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह नए लोगों को अपने जाल में फंसा रही थी। यह गिरोह मुख्य रूप से नौकरीपेशा लोगों या अधिकारियों को निशाना बनाता था, जिनका पहले से कोई लोन चल रहा हो। गरिमा उन्हें यह विश्वास दिलाती थी कि वह उनका पुराना लोन बंद कराकर, कम ब्याज दर पर नया बड़ा व्यक्तिगत लोन दिलवा देगी। इसके अलावा, वह पीड़ितों को यह भी भरोसा देती थी कि नए लोन की ईएमआई वह खुद भरेगी। जैसे ही लोन की पूरी रकम गरिमा के खातों में ट्रांसफर होती थी, वह गायब हो जाती थी। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश और उनके खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई में जुटी हुई है।