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गौतम गंभीर ने AI डीपफेक के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया मुकदमा

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मुकदमा दायर किया है, जिसमें उन्होंने AI द्वारा निर्मित डीपफेक और बिना अनुमति के उनके चेहरे और आवाज के उपयोग के खिलाफ अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है और सभी संबंधित अकाउंट्स को हटाने की भी मांग की है। यह मामला सोशल मीडिया पर बढ़ते डिजिटल नकल के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

गौतम गंभीर का कानूनी कदम

नई दिल्ली - भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक सिविल मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे में उन्होंने डिजिटल नकल, एआई द्वारा निर्मित डीपफेक, और बिना अनुमति के उनकी आवाज और चेहरे का उपयोग करने वाले अभियानों के खिलाफ अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।


सोशल मीडिया पर बढ़ती चिंताएं

गौतम गंभीर की कानूनी टीम ने 2025 के अंत से इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, और फेसबुक पर नकली डिजिटल सामग्री में तेजी से वृद्धि देखी है। कई खातों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग और वॉइस-क्लोनिंग तकनीकों का उपयोग कर गंभीर को ऐसे बयान देते हुए दिखाया है जो उन्होंने कभी नहीं दिए। इनमें एक नकली इस्तीफे की घोषणा भी शामिल है, जिसे 29 लाख से अधिक बार देखा गया। एक अन्य नकली क्लिप में उन्हें सीनियर क्रिकेटरों के विश्व कप में भाग लेने के बारे में टिप्पणी करते हुए दिखाया गया, जिसे 17 लाख से ज्यादा बार देखा गया।


मुकदमे में शामिल पक्ष

यह मुकदमा 16 प्रतिवादियों के खिलाफ दायर किया गया है, जिसमें कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे जैनकी फ्रेम्स और भूपेंद्र पेंटोला शामिल हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे ऐमेजॉन और फ्लिपकार्ट का भी नाम है। टेक कंपनियों में मेटा प्लेटफॉर्म, एक्स, गूगल, और यूट्यूब शामिल हैं। आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी इस मामले में शामिल किया गया है।


गौतम गंभीर की मांगें

गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना, सभी संबंधित अकाउंट्स को हटाने, स्थायी रोक लगाने और सभी उल्लंघनकारी सामग्री को हटाने की मांग की है। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में उनके नाम, चेहरे और आवाज का उपयोग न किया जाए। गंभीर ने कहा, “मेरी पहचान और मेरे नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह केवल व्यक्तिगत चोट का मामला नहीं है, बल्कि कानून और सम्मान का मामला है।”