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ग्रामीण स्कूलों के सुधार के लिए अभिजीत दिपके का नया अभियान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 'School Thik Karo' नामक एक नई मुहिम की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार करना है। यह अभियान स्वतंत्रता दिवस पर शुरू होगा और इसके तहत अभिभावक स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का सामाजिक ऑडिट करेंगे। दिपके ने ग्रामीण शिक्षा की अनदेखी को गंभीर समस्या बताते हुए इसे सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही, हमीरपुर में बच्चों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके भविष्य की लड़ाई है।
 

नई मुहिम का आगाज़


कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार लाने के लिए एक नई मुहिम की घोषणा की है। इस अभियान का नाम 'School Thik Karo' रखा गया है, जो स्वतंत्रता दिवस पर शुरू होगा। पार्टी का उद्देश्य गांवों के स्कूलों में लंबे समय से नजरअंदाज की गई बुनियादी जरूरतों को उजागर करना है।


ग्रामीण बच्चों की समस्याओं पर ध्यान

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, अभिजीत दिपके ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांवों के बच्चों को स्कूल में आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इस अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को उजागर किया जाएगा और सुधार की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।


हमीरपुर में बच्चों का प्रदर्शन

इस घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में चांदपुर गांव के स्कूली बच्चों का प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सैकड़ों बच्चे अपने अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और स्कूल तक जाने के लिए उचित सड़क की मांग की। दिपके ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे बच्चों के भविष्य की लड़ाई बताया।


स्कूलों का सामाजिक ऑडिट

CJP के अनुसार, 'School Thik Karo' के तहत अभिभावक सरकारी स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का सामाजिक ऑडिट करेंगे। इसके बाद, कमियों की जानकारी स्थानीय स्तर पर साझा की जाएगी। पार्टी ग्राम प्रधानों से भी स्कूलों की स्थिति सुधारने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील करेगी।


अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र से

अभिजीत दिपके ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत उनके गांव से होगी। इसके बाद CJP अन्य गांवों के स्कूलों तक पहुंचने की योजना बना रही है। उनका मानना है कि ग्रामीण शिक्षा ढांचे की अनदेखी को अब स्थानीय समुदाय की भागीदारी से चुनौती दी जानी चाहिए।


सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल

दिपके ने सरकारों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास बनाया जा सकता है, लेकिन गांवों में बेहतर स्कूल बनाने में इतनी कठिनाई क्यों आती है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसानों और मजदूरों के बच्चों को देश का भविष्य नहीं माना जाना चाहिए।


शिक्षा क्रांति का आह्वान

CJP के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास ने भी इस अभियान का समर्थन किया। उन्होंने सरकारी स्कूलों की अनदेखी को अस्वीकार्य बताते हुए सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। पार्टी का मानना है कि नई पीढ़ी की भागीदारी से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की मुहिम को गति दी जा सकती है।