ग्रीन इंडिया मिशन की रिपोर्ट: लक्ष्य से बहुत पीछे, प्रशासनिक खामियां उजागर
नई दिल्ली में ग्रीन इंडिया मिशन की चिंताजनक रिपोर्ट
नई दिल्ली: देश में हरियाली को बढ़ावा देने और जंगलों की स्थिति में सुधार लाने के लिए चलाए जा रहे ग्रीन इंडिया मिशन के संबंध में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015-16 से 2024-25 के बीच निर्धारित वन आवरण लक्ष्य का अधिकांश भाग हासिल नहीं किया गया है।
दस वर्षों में लक्ष्य से बहुत पीछे
संसद में बुधवार को प्रस्तुत की गई प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में कैग ने खुलासा किया कि ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वन आवरण बढ़ाने का लक्ष्य 14 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले वास्तविक वृद्धि केवल 0.03 लाख हेक्टेयर रही, जो निर्धारित लक्ष्य की तुलना में लगभग 98 प्रतिशत कम है। इसी तरह, वन क्षेत्र की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ, जहां 14 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.11 लाख हेक्टेयर में सुधार हुआ, जो करीब 92 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
योजना और निगरानी में खामियां
कैग ने मिशन के कमजोर प्रदर्शन के पीछे कई प्रशासनिक और योजनागत कमियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पेड़ लगाने के लिए कई स्थानों पर सही भू-दृश्य का चयन नहीं किया गया। विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच समन्वय की कमी भी देखी गई। इसके अलावा, वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ियां, कमजोर योजना निर्माण, विभागों के बीच समन्वय की कमी और निगरानी में खामियां भी सामने आईं। इन कारणों से मिशन के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में बाधाएं आईं।
मिशन का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं था
ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य केवल नए पेड़ लगाना नहीं था, बल्कि इसमें जंगलों और गैर-जंगल क्षेत्रों में हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता को बढ़ावा देना, जल संबंधी पारिस्थितिकी सेवाओं को बेहतर बनाना और कार्बन अवशोषण की क्षमता को बढ़ाना भी शामिल था। इसके साथ ही, जंगलों पर निर्भर परिवारों की आजीविका और आय में सुधार को भी मिशन का हिस्सा बनाया गया था। लेकिन कैग की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि इन व्यापक उद्देश्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।
जलवायु परिवर्तन से लड़ाई पर प्रभाव
कैग की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब जंगलों और पेड़ों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वनीकरण के दौरान कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे हरित आवरण बढ़ाने के प्रयासों का प्रभाव सीमित रहा। वन क्षेत्र की गुणवत्ता और विस्तार में लक्ष्य के मुकाबले भारी अंतर यह सवाल उठाता है कि भविष्य में मिशन की योजना, धन के उपयोग और निगरानी को कैसे मजबूत किया जाएगा।