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ग्लोबल तापमान में वृद्धि: कृषि पर गंभीर प्रभाव

ग्लोबल तापमान में वृद्धि एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व की कृषि प्रणालियों को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास के कारण पेड़ों की कमी और बढ़ती गर्मी से 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तापमान में वृद्धि से प्रमुख फसलों की पैदावार में कमी आ रही है। इसके अलावा, समुद्री जीवन भी इस समस्या से प्रभावित हो रहा है। जानें इस मुद्दे के बारे में और अधिक जानकारी।
 

पर्यावरण असंतुलन का खतरा


भारत और विश्व में पर्यावरण असंतुलन के प्रभाव


वर्तमान में, पर्यावरण असंतुलन एक गंभीर खतरा बन चुका है, जो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास के कारण पिछले कुछ दशकों में अनगिनत पेड़ काटे गए हैं, जिससे यह समस्या और बढ़ गई है। पेड़ों की कमी के कारण सूर्य की किरणें अधिक समय तक सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप हर साल गर्मी में वृद्धि हो रही है।


100 करोड़ लोगों के लिए खतरा

गर्मी की बढ़ती तीव्रता वैश्विक कृषि प्रणालियों को संकट में डाल रही है। इससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है, जिससे 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह कृषि, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा कि गर्मी यह निर्धारित कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।


फसलों पर गर्मी का प्रभाव

यदि तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना बढ़ सकती है। वैश्विक औसत तापमान में हर एक डिग्री की वृद्धि से प्रमुख फसलों जैसे मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आ सकती है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस को पार करता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।


समुद्री जीवन पर भी प्रभाव

गर्मी का प्रभाव केवल भूमि तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91% महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व संकट में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां प्रभावित हो रही हैं। कृषि से संबंधित रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में आवश्यक बदलाव कर सकें।