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चंडीगढ़ के अस्पताल में बिजली कटौती से नवजात और प्रसूताओं को झेलनी पड़ी गर्मी

चंडीगढ़ के सेक्टर 22 सिविल अस्पताल में बिजली कटौती के कारण नवजात बच्चों और प्रसूताओं को गर्मी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल में लगभग 6 घंटे तक बिजली नहीं रही, जिससे मरीजों को असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ा। इस घटना ने कई सवाल उठाए हैं, जैसे कि क्या अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी। जानें इस घटना के बारे में विस्तार से।
 

चंडीगढ़ सेक्टर 22 अस्पताल में बिजली संकट


चंडीगढ़ सेक्टर 22 अस्पताल की स्थिति: अस्पताल में माताएं अपने नवजात बच्चों के साथ गर्मी में परेशान थीं। ऑपरेशन के बाद कई महिलाएं कमजोरी महसूस कर रही थीं, जबकि नवजात बच्चे गर्मी से बेहाल थे। वार्ड में पंखे बंद थे और हवा का कोई इंतजाम नहीं था। परिजन कागज और हाथ के पंखों से बच्चों को हवा देने की कोशिश कर रहे थे। रविवार को लगभग 6 घंटे तक बिजली कटौती के कारण यह स्थिति बनी रही।


अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की संख्या


सेक्टर-22 सिविल अस्पताल में रविवार को करीब 30 प्रसूताएं भर्ती थीं, जिनमें से कई ने हाल ही में ऑपरेशन कराया था। गर्मी और उमस में रहना उनके लिए और कठिन हो गया। वार्ड नंबर-3 और 4 में स्थिति सबसे खराब थी, जहां नवजात बच्चे भी भर्ती थे। बिजली जाने के बाद पंखे बंद हो गए और गर्मी बढ़ गई।


बिजली की कटौती का समय


बिजली विभाग ने पहले से अस्पताल प्रशासन को सूचित किया था कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली बंद रहेगी। बिजली कटने के बाद अस्पताल में गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे मरीजों को काफी परेशानी हुई।


बिजली विभाग का पत्र


बिजली विभाग ने अस्पताल को पहले ही सूचित किया था कि शटडाउन के दौरान वैकल्पिक बिजली व्यवस्था करने की आवश्यकता थी। लेकिन अस्पताल का जनरेटर भी मरम्मत में था, जिससे कोई बैकअप नहीं मिल सका।


घटना पर उठे सवाल


इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं, जैसे कि क्या प्रसूताओं और नवजातों के लिए अस्थायी व्यवस्था की जा सकती थी? परिजनों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील वार्डों में अतिरिक्त पंखे या बैकअप व्यवस्था होनी चाहिए थी।


अस्पताल का स्पष्टीकरण


अस्पताल की अधीक्षक डॉ. ऋतु बस्सी ने कहा कि बिजली विभाग की सूचना के अनुसार शटडाउन आवश्यक था। उन्होंने बताया कि जनरेटर की मरम्मत सुरक्षा के लिए जरूरी थी।