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चंडीगढ़ में 100 करोड़ रुपये का ईसीएचएस घोटाला: सीबीआई ने किया बड़ा खुलासा

चंडीगढ़ में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) में लगभग 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। एजेंसी ने फर्जी लैब रिपोर्ट, नकली मेडिकल सर्टिफिकेट और धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेजों को जब्त किया है। जांच में सामने आया है कि एक कमीशन आधारित नेटवर्क के तहत मरीजों को महंगे इंजेक्शन और दवाइयां लिखी जा रही थीं। सीबीआई अब उन मरीजों की भी जांच कर रही है जिनके नाम पर मेडिकल बिल बनाए गए हैं।
 

ईसीएचएस घोटाले की जांच में सीबीआई के महत्वपूर्ण खुलासे

चंडीगढ़: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) में लगभग 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जांच के दौरान एजेंसी को फर्जी लैब रिपोर्ट, नकली मेडिकल सर्टिफिकेट और धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।


चंडीगढ़ के सेक्टर-38 में स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर से हार्ड डिस्क जब्त की गई है, जबकि सेक्टर-15 के एक निजी अस्पताल से भी धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं। सीबीआई की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ईसीएचएस के तहत चिकित्सा सेवाओं का पूरा तंत्र कमीशन पर आधारित था।


‘मंथन हेल्थ केयर’ नामक संस्था कथित तौर पर विभिन्न अस्पतालों को मरीज उपलब्ध कराती थी और इसके बदले में मोटा कमीशन लेती थी। इस संस्था का संचालन एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और एक बीएएमएस डिग्री धारक द्वारा किया जा रहा था।


इन व्यक्तियों के माध्यम से आगे मेडिसिन के डॉक्टरों को जोड़ा गया था। सीबीआई ने डॉक्टर रिंपल और डॉक्टर विकास से भी पूछताछ की है और कई अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।


शिकायत के अनुसार, सेक्टर-38 के डायग्नोस्टिक सेंटर में फर्जी लैब रिपोर्ट तैयार की जा रही थीं। इन रिपोर्टों के आधार पर मरीजों को महंगे इंजेक्शन और दवाइयां लिखी जाती थीं। कई मामलों में मरीजों को केवल कागजों पर भर्ती दिखाया गया, जबकि वे वास्तव में अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे।


सेक्टर-15 स्थित धर्म हॉस्पिटल में ईसीएचएस के तहत दर्जनों मरीजों का इलाज दर्शाया गया। आरोप है कि मोटे बिल बनाने वाले मामलों में मरीजों को भी हिस्सेदारी दी जाती थी। जांच में महंगे इंजेक्शन का बड़ा खेल भी सामने आया है। एक ही इंजेक्शन का बॉयल नंबर कई अलग-अलग मरीजों के रिकॉर्ड में दर्ज मिला है।


5 से 10 हजार रुपये कीमत वाले इंजेक्शन कई मरीजों को लगाए गए दिखाए गए। प्रत्येक मरीज के नाम पर 3 से 4 लाख रुपये तक के इंजेक्शन और दवाइयों का बिल बनाया गया। इसके दस्तावेजी प्रमाण भी सीबीआई को मिले हैं।


एजेंटों के माध्यम से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू से मरीजों को चंडीगढ़ लाया जाता था। कई मामलों में मरीजों को केवल दस्तावेजों में ही भर्ती दिखाया गया। सीबीआई अब उन मरीजों को भी जांच में शामिल करेगी जिनके नाम पर मेडिकल बिल बनाए गए। इसके अलावा, एजेंसी सरकारी कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है।