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चंद्रमा पर चना उगाने की सफलता: क्या अंतरिक्ष यात्री खुद का भोजन उगा सकेंगे?

टेक्सस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर चना उगाने में सफलता हासिल की है, जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भोजन उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रयोग में काबुली चने की 'माइल्स' किस्म का उपयोग किया गया है, जो चंद्रमा की कठिन परिस्थितियों में उगने के लिए उपयुक्त है। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की मिट्टी की समस्याओं को समझते हुए एक नई मिट्टी तैयार की है, जिसमें फंगस का उपयोग किया गया है। यह खोज चंद्रमा पर बस्ती बसाने के सपने को साकार करने में मदद कर सकती है।
 

चंद्रमा पर भोजन उगाने की दिशा में एक नई खोज


नई दिल्ली: भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खुद का भोजन उगाना एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। चांद पर संसाधनों का उपयोग करके आत्मनिर्भरता हासिल करना आवश्यक है, क्योंकि पृथ्वी से सामान भेजना महंगा और कठिन है। इसी सोच के तहत टेक्सस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक अनूठा प्रयोग किया और इसमें सफलता प्राप्त की। उन्होंने चंद्रमा जैसी कृत्रिम मिट्टी में चना उगाकर यह साबित किया कि स्पेस फार्मिंग संभव है।


काबुली चने की 'माइल्स' किस्म का चयन

शोधकर्ताओं ने काबुली चने की 'माइल्स' किस्म को चुना, जो आकार में छोटी और तनाव सहन करने में सक्षम है, जिससे यह अंतरिक्ष के सीमित वातावरण के लिए उपयुक्त बनती है। इस सफल प्रयोग ने यह उम्मीद जगाई है कि भविष्य में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री ताजा चना उगा सकेंगे, जिससे उन्हें पौष्टिक भोजन प्राप्त होगा और लंबी मिशनों में निर्भरता कम होगी।


चंद्रमा की मिट्टी की चुनौतियाँ

चंद्रमा की सतह पर लूनर रेगोलिथ, यानी धूल जैसी मिट्टी होती है। इसमें आवश्यक खनिज तो होते हैं, लेकिन बैक्टीरिया और कार्बनिक पदार्थों की कमी होती है। इसके अलावा, कुछ भारी धातुएं पौधों के विकास में बाधा डालती हैं। पृथ्वी की मिट्टी से यह बहुत भिन्न है। प्रोजेक्ट की प्रमुख वैज्ञानिक सारा ओलिवेरा सैंटोस ने बताया कि उनका उद्देश्य यह समझना था कि इस रेगोलिथ को पौधों के लिए उपयोगी मिट्टी में कैसे परिवर्तित किया जाए।


मिट्टी को सुधारने की प्रक्रिया

वैज्ञानिकों ने अपोलो मिशन के नमूनों के समान कृत्रिम मिट्टी तैयार की। इसमें रेड विगलर केंचुओं से बनी वर्मीकम्पोस्ट खाद मिलाई गई, जो पोषक तत्वों और अच्छे बैक्टीरिया से भरपूर होती है। चने के बीजों पर अरबस्कुलर माइकोराइजल फंगस लगाया गया, जो जड़ों को पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है और भारी धातुओं के प्रभाव को कम करता है।


फंगस की भूमिका और प्रयोग के परिणाम

परिणामों से पता चला कि 75 प्रतिशत तक चंद्र धूल वाले मिश्रण में भी चने उगाए जा सकते हैं और बीज उत्पन्न कर सकते हैं। हालांकि, धूल की अधिक मात्रा में पौधे कमजोर पड़ने लगे। जिन पौधों पर फंगस लगाया गया था, वे बिना फंगस वाले पौधों की तुलना में अधिक समय तक स्वस्थ रहे। फंगस ने इस कृत्रिम मिट्टी में अच्छी तरह से स्थिरता प्राप्त की, जिससे इसे बार-बार लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।


अगला कदम यह जांचना है कि चांद पर उगाए गए चने खाने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं और उनमें पोषण की मात्रा कितनी है। यह प्रयोग स्पेस फार्मिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो चंद्रमा पर बस्ती बसाने के सपने को साकार करने में मदद कर सकता है।