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चंबा बस दुर्घटना: कई परिवारों पर छाया दुख का साया

चंबा में एक बस दुर्घटना ने कई परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस हादसे में 7 लोगों की जान गई और 11 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटना ने पति-पत्नी और चार बेटियों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। जानें इस दुखद घटना के बारे में और कैसे स्थानीय समुदाय ने मदद की।
 

दुखद घटना के बाद का मंजर


मृतकों के पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपे जा रहे, घायलों की सलामति की दुआएं कर रहे परिजन


चंबा में हुए बस हादसे को 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसका भयानक दृश्य अभी भी लोगों के मन में ताजा है। इस दुर्घटना में 7 व्यक्तियों की जान गई और 11 अन्य घायल हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है।


इस घटना ने कई परिवारों को जीवनभर का दर्द दे दिया है। दरअसल, चलुंज मोड़ के पास बस का टाई रॉड टूट गया था। बस के गिरने की आवाज सुनकर योगराज और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने घायल लोगों की मदद की।


ग्रामीणों की मानवता की मिसाल

हालांकि यह हादसा बहुत दुखद था, लेकिन स्थानीय लोगों ने मानवता की एक अद्भुत मिसाल पेश की। जैसे ही उन्हें घटना की सूचना मिली, ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए। उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त बस को हटाकर घायलों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। यदि ग्रामीणों ने तत्परता नहीं दिखाई होती, तो मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती थी।


पति-पत्नी ने एक साथ छोड़ी दुनिया

जगदेव और हरदेई ने एक साथ जीने और मरने की कसम निभाई। इस दुर्घटना में दोनों की मौत हो गई। जगदेव और उनकी पत्नी हरदेई बस में यात्रा कर रहे थे। जब बस लुढ़की, तो दोनों नीचे गिर गए और मौके पर ही उनकी जान चली गई।


चार बेटियों के सिर से उठा मां का साया

इस हादसे में चार बेटियों ने अपनी मां को खो दिया। चारों बच्चियां भी घायल हुई हैं और उन्हें अभी तक अपनी मां की मौत की जानकारी नहीं है। वे बस में अपनी मां के साथ अपने ननिहाल जा रही थीं।