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चक्रवात मुरासु: आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का खतरा, तूफान कमजोर हुआ

चक्रवात मुरासु, जो दक्षिण भारत में तबाही मचा रहा था, अब कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया है। हालांकि, आंध्र प्रदेश में भारी बारिश और जलभराव का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों को महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि इसके अवशेष प्रणाली बारिश और तेज हवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों की समीक्षा की है और प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। जानें इस चक्रवात के प्रभाव और राहत कार्यों के बारे में अधिक जानकारी।
 

चक्रवात मुरासु का मौसम अपडेट


दक्षिण भारत में तबाही मचाने वाला चक्रवात 'मुरासु' अब कमजोर हो रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, मुरासु 3 नवंबर की रात 11:30 बजे तक डीप डिप्रेशन में परिवर्तित हो गया। यह प्रणाली तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वी तेलंगाना के ऊपर सक्रिय है। हालांकि तूफान की तीव्रता में कमी आई है, फिर भी आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और जलभराव का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, मुरासु उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके 4 नवंबर की सुबह तक सामान्य डिप्रेशन में कमजोर होने की संभावना है।


चक्रवात मुरासु की स्थिति

IMD के अनुसार, चक्रवात मुरासु अब कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल चुका है। इसके केंद्र की स्थिति तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वी तेलंगाना के आसपास है। मौसम विभाग द्वारा जारी विभिन्न बुलेटिन में इसके केंद्र की दूरी में बदलाव देखा गया है। 3 नवंबर को जारी एक आधिकारिक तटीय बुलेटिन में बताया गया कि सिस्टम का केंद्र नंदीगामा से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम और विजयवाड़ा से करीब 70 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम है। इस दौरान, सिस्टम की अधिकतम निरंतर हवा की गति 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। IMD ने अनुमान लगाया है कि उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए इसकी हवाओं की गति घटकर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है।


अगले 12 घंटे का महत्व

मुरासु के कमजोर होने के बावजूद, अगले कुछ घंटे आंध्र प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हैं। डीप डिप्रेशन के अवशेष प्रणाली बारिश और तेज हवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, सिस्टम के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ इसकी तीव्रता में और कमी आने की संभावना है। इसका प्रभाव तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है। मौसम विभाग ने 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है, इसलिए निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और तटीय बस्तियों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए।


भारी बारिश का खतरा

चक्रवात मुरासु के प्रभाव से दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। प्रकाशम, बापटला, पलनाडु, गुंटूर और कृष्णा जिले तूफान से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा, एलुरु और पश्चिम गोदावरी के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। तूफान के तट से टकराने के दौरान हजारों पेड़ उखड़ गए और सैकड़ों बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई, सड़क यातायात प्रभावित हुआ और निचले इलाकों में पानी भर गया। खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें आई हैं।


समुद्र की स्थिति

चक्रवात के प्रभाव से बापटला जिले के तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति भी खराब रही। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। सूर्यलंका बीच पर समुद्र का पानी किनारे से काफी अंदर तक पहुंचने की जानकारी मिली है। तूफान के कारण समुद्र में उथल-पुथल और तेज हवाओं को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई थी। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और समुद्र के नजदीक जाने से बचने की हिदायत दी है।


मुख्यमंत्री की समीक्षा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को सचिवालय स्थित रियल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) केंद्र से चक्रवात मुरासु के प्रभाव और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न जिलों में हुई बारिश, हवा की गति, नुकसान और राहत व्यवस्था की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की सतर्कता और समय पर उठाए गए कदमों से कई कीमती जानें बचाई जा सकीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मौसम और जमीनी हालात से जुड़े आंकड़ों का लगातार विश्लेषण किया जाए और राहत एवं बहाली का काम प्रभावी तरीके से जारी रखा जाए।