चक्रवाती तूफान मुरसु ने आंध्र प्रदेश में दस्तक दी
चक्रवात मुरसु का आगमन
चक्रवाती तूफान मुरसु: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार की सुबह लगभग एक बजे चक्रवात मुरसु ने आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में ओंगोल के निकट तट को पार करना शुरू किया। यह तूफान बंगाल की खाड़ी के पश्चिम मध्य क्षेत्र में उत्पन्न हुआ था और राज्य के दक्षिणी तट के करीब पहुंच चुका था।
जैसे ही तूफान ने भूमि को छुआ, इसका केंद्र तट से टकरा गया। यह ओंगोल से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, कावली से 60 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और बापटला से 70 किलोमीटर दक्षिण में स्थित था।
पूर्वी तट पर खतरे की चेतावनी
ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु अक्सर चक्रवाती तूफानों के प्रभाव में रहते हैं। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल औसतन दो से चार उष्णकटिबंधीय चक्रवात आते हैं। लगभग 80 प्रतिशत चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं और पूर्वी तट पर टकराते हैं, जिससे यह क्षेत्र चक्रवात के लिए उच्च जोखिम वाला माना जाता है।
ओडिशा से आंध्र प्रदेश तक जोखिम का आकलन
ओडिशा चक्रवात और आकाशीय बिजली के लिए संवेदनशील है। खराब मौसम के दौरान इसके तटीय जिलों को तेज हवाओं और भारी बारिश का सामना करना पड़ता है। आंध्र प्रदेश भी उच्च जोखिम वाला राज्य है, जहां नेल्लोर, नरसापुर और प्रकाशम जैसे दक्षिणी तटीय क्षेत्र संवेदनशील हैं। नवंबर 2026 की शुरुआत में, मुरसु ने आंध्र और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई, जिससे गंभीर बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई।
बंगाल-तमिलनाडु और पश्चिमी तट का जोखिम
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय जिले अक्सर चक्रवात के रेड अलर्ट जोन में आते हैं। दूसरी ओर, अरब सागर में चक्रवातों की संख्या बंगाल की खाड़ी की तुलना में कम होती है। ऐतिहासिक रूप से, हर दो से चार चक्रवातों में से केवल एक पश्चिमी तट की ओर बढ़ता है। गुजरात के कच्छ-सौराष्ट्र और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में जोखिम अधिक है, जबकि गोवा, कर्नाटक और केरल में सीधी टक्कर की संभावना कम है।
भीतरी क्षेत्रों पर भी प्रभाव
चक्रवात का प्रभाव केवल तट तक सीमित नहीं रहता। जब तूफान तट से टकराता है, तो हवा कमजोर होने पर भी इसका प्रभाव भीतरी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, जलभराव और आंधी-तूफान जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसका मतलब है कि खतरा तट से दूर बसे राज्यों के लिए भी बना रहता है।