चमोली में मदरसे के खिलाफ हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन
चमोली में विवादास्पद मदरसे का मामला
चमोली, गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां के सनातन तीर्थ ज्योतिर्मठ में एक आवासीय भवन के अंदर कथित तौर पर मदरसा चलाने का आरोप लगाया गया है। जैसे ही यह जानकारी हिंदू संगठनों को मिली, उन्होंने मौके पर पहुंचकर जोरदार हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया।
मदरसा का संचालन बंद कमरे में
सूत्रों के अनुसार, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि एक निजी भवन में गुपचुप तरीके से मदरसा चलाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस आवासीय परिसर में स्थानीय बच्चों को उर्दू और इस्लामिक धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी। इसके अलावा, इन संगठनों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए ₹12,000 मासिक वेतन पर एक विशेष शिक्षक नियुक्त किया गया था। विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ज्योतिर्मठ आदिगुरु शंकराचार्य की पवित्र तपस्थली है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का अवैध मदरसा चलाना स्वीकार्य नहीं है। इसके कार्यकर्ताओं ने स्थानीय कोतवाली जाकर पुलिस और प्रशासन को इस मामले की जानकारी दी और तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शिक्षक ने आरोपों का खंडन किया
वहीं, भवन में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक मिन्नादुल्ला ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि वहां किसी प्रकार का मदरसा नहीं चलाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि भवन में केवल नियमित नमाज अदा की जाती है और कुछ बच्चे कभी-कभी उर्दू सीखने आते हैं।
प्रशासन ने शुरू की जांच
इस मामले के बढ़ते विवाद के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस सतर्क हो गई हैं। कोतवाली निरीक्षक और तहसीलदार ने हिंदू संगठनों से शिकायत पत्र मिलने की पुष्टि की है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में, उत्तराखंड सरकार राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।