चांद पर मानव की वापसी: नासा का आर्टेमिस दो मिशन
चांद की ओर नई यात्रा
नई दिल्ली। 56 वर्षों के अंतराल के बाद, मानवता एक बार फिर चांद के निकट पहुंचने जा रही है। अपोलो 13 मिशन के बाद, यह पहला अवसर है जब चार अंतरिक्ष यात्री चांद के पार यात्रा करेंगे। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के आर्टेमिस दो अभियान के तहत, ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार ये चार अंतरिक्ष यात्री भारतीय समयानुसार 6 अप्रैल को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं।
ये चारों अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को देखेंगे, जिसे मानवता ने केवल तस्वीरों में देखा है। वे पृथ्वी से सबसे दूर जाने का 56 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में हैं। अपोलो 13 ने 1970 में 400,171.18 किलोमीटर की दूरी तय की थी, जबकि आर्टेमिस दो के मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के 402,336 किलोमीटर दूर जाने की संभावना है। भारतीय समय के अनुसार, मंगलवार को दोपहर में ये यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
नासा ने इस मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह के 30 महत्वपूर्ण लक्ष्यों की सूची प्रदान की है, जिनकी उन्हें फोटोग्राफी करनी है। इनमें सबसे प्रमुख 'ओरिएंटल बेसिन' है, जो लगभग 600 मील चौड़ा क्रेटर है। यह क्रेटर 3.8 अरब वर्ष पहले एक उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसके अलावा, वे 'हर्ट्जस्प्रंग बेसिन' का भी अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझ सकें कि समय के साथ चांद की सतह में क्या परिवर्तन आया है।