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चित्रकूट में बाल शोषण के मामले में दंपति को मिली फांसी की सजा, जानें पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक विशेष अदालत ने नाबालिग बच्चों के अश्लील वीडियो बनाने और उन्हें डार्क वेब पर बेचने के आरोप में एक दंपति को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में सीबीआई ने जांच की और कई पीड़ितों की पहचान की। अदालत ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया है। जानें इस भयावह मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
 

विशेष अदालत का ऐतिहासिक फैसला


उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को एक दंपति को मौत की सजा सुनाई है। यह दंपति नाबालिग बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें डार्क वेब पर बेचने के आरोप में दोषी पाए गए। बांदा की पॉक्सो कोर्ट ने राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई, जिससे क्षेत्र में एक भयावह बाल शोषण मामले को न्याय मिला।


सजा का आधार और मुआवजा

कोर्ट ने दोनों को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। चूंकि अपराध सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 377 के पढ़ने से पहले का था, इसलिए आईपीसी की धारा 377 भी लागू की गई। अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाते हुए राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पहचाने गए पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।


सीबीआई की जांच और गिरफ्तारी

इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई थी। अक्टूबर 2020 में बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों में बाल यौन शोषण की रिपोर्ट्स के बाद दंपति को गिरफ्तार किया गया।


बच्चों को शिकार बनाने की विधि

जांचकर्ताओं के अनुसार, राम भवन और दुर्गावती ने 5 से 16 साल के बच्चों को निशाना बनाया। उन्होंने बच्चों को लालच देकर अपने घर बुलाया, यौन शोषण किया और मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से वीडियो रिकॉर्ड किया।


तलाशी में मिली सामग्री

आरोपियों के घर की तलाशी में सीबीआई ने 8 लाख रुपये नकद, 12 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और छह पेन ड्राइव बरामद किए।


फॉरेंसिक जांच के परिणाम

जब्त की गई डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच में बड़ी मात्रा में बाल यौन शोषण सामग्री की पुष्टि हुई। वीडियो और तस्वीरें एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डार्कनेट चैनलों के माध्यम से खरीदारों तक पहुंचाई गईं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे।


पीड़ितों की पहचान

प्रारंभिक जांच में 33 बाल पीड़ितों की पहचान की गई। चार्जशीट में 4 से 22 साल के व्यक्तियों के बयान भी शामिल थे। दुर्गावती पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप भी लगा है। इसके अलावा, मामले में दिल्ली से एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है और आगे की जांच जारी है।


फैसले का महत्व

यह फैसला ऑनलाइन संगठित बाल शोषण की गंभीरता को उजागर करता है और ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों के लिए कठोर सजा का संकेत देता है।