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चित्रकूट में सरयू नदी के पुनर्जीवन के लिए हाई-टेक सर्वेक्षण शुरू

चित्रकूट में सरयू नदी के विलुप्त होने के बाद उसे पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एक हाई-टेक सर्वेक्षण शुरू किया है, जिसका उद्देश्य नदी के पुराने जलमार्ग को पुनः स्थापित करना है। इस सर्वेक्षण से न केवल सरयू नदी का अस्तित्व लौटेगा, बल्कि मंदाकिनी नदी को भी इसका लाभ मिलेगा। जानें इस परियोजना के महत्व और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

सरयू नदी को नया जीवन देने की पहल

चित्रकूट। चित्रकूट में कंक्रीट के जाल और अवैध अतिक्रमण के कारण पूरी तरह विलुप्त हो चुकी सरयू नदी को नया जीवन देने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक नदी की पुरानी जलधारा को ढूंढने के लिए प्रशासन अब आधुनिक विज्ञान का सहारा ले रहा है। बता दें कि यहां राजस्व विभाग, नगर पालिका और संयुक्त क्षेत्र विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने नदी के मार्ग को ट्रेस करने के लिए एक हाई-टेक वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया है।


आधुनिक तकनीक से नदी की सीमाओं का निर्धारण

अधिकारियों ने बताया कि इस महासर्वेक्षण में GNSS Rover और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक सैटेलाइट सिग्नलों के माध्यम से जमीन की सटीक बनावट और टोपोग्राफी का डेटा तैयार करती है। इससे नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र और उसकी वास्तविक सीमाओं का सही और सटीक नक्शा तैयार किया जा सकेगा। जब सर्वे पूरा हो जाएगा, तब नदी की भूमि पर पिलर लगाकर सीमांकन किया जाएगा, जिससे भविष्य में रामघाट और आसपास के क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।


त्रिवेणी संगम का पुनर्जीवन

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामदगिरि पर्वत क्षेत्र से निकलने वाली सरयू नदी लगभग पांच किलोमीटर लंबी है। यह राघव प्रयागघाट में जाकर मंदाकिनी नदी में मिल जाती थी। इसी स्थान पर पयश्वनी नदी का भी मिलन होता था, जिससे यहां एक पवित्र त्रिवेणी संगम बनता था। समय के साथ सरयू नदी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने से यह संगम भी प्रभावित हुआ। इस वैज्ञानिक सर्वे के माध्यम से नदी के पुराने जलमार्ग को खोजा जाएगा। साथ ही उससे जुड़े उन बंद हो चुके प्राकृतिक जलस्रोतों की भी पहचान की जाएगी जो कभी इसे पानी देते थे।


मंदाकिनी नदी को मिलेगा लाभ

इस परियोजना के सफल होने से न केवल चित्रकूट की एक खोई हुई धरोहर वापस लौटेगी, बल्कि इसका सीधा फायदा मंदाकिनी नदी को भी मिलेगा। सरयू की जलधारा दोबारा शुरू होने से मंदाकिनी नदी में जल का संकट दूर होगा और उसका प्रवाह साल भर मजबूत बना रहेगा।