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चीन और जापान में भूकंप के झटके, चीन में 6.3 तीव्रता का भूकंप

चीन के किंघाई प्रांत में मंगलवार को भूकंप के झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। 40 मिनट के भीतर 8 बार भूकंप आया, जिसमें सबसे शक्तिशाली झटका 6.3 तीव्रता का था। इस आपदा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए हैं। प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है। इसी दिन जापान के इबाराकी प्रांत में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानें इस प्राकृतिक आपदा के बारे में और अधिक जानकारी।
 

चीन में भूकंप का कहर

बीजिंग: चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित किंघाई प्रांत में मंगलवार शाम को भूकंप के कई झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया। महज 40 मिनट के भीतर इस क्षेत्र में 8 बार भूकंप आया, जिसमें सबसे शक्तिशाली झटका 6.3 तीव्रता का था। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था और यह प्रांत की राजधानी शियांग से लगभग 567 किलोमीटर दूर स्थित था। इस प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासन ने तुरंत प्रभावित क्षेत्र में आपातकालीन अलर्ट जारी किया है।


भूकंप से हुई जनहानि

एक की मौत, कोयला खदानों से सुरक्षित निकाले गए मजदूर

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस भूकंप में एक व्यक्ति की जान चली गई है और चार अन्य लोग घायल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने त्वरित बचाव अभियान शुरू किया है। राहत कार्यों के लिए 2 विशेष गाड़ियां और 10 कर्मियों को घटनास्थल पर भेजा गया है। इसके अलावा, आसपास की कोयला खदानों में काम कर रहे श्रमिकों को भी सुरक्षित स्थान पर बुला लिया गया है। स्थानीय प्रशासन हताहतों और संपत्ति के नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है।


भूकंप के प्रति संवेदनशील क्षेत्र

क्यों है यह क्षेत्र भूकंप के लिए संवेदनशील?

किंघाई प्रांत तिब्बती पठार के किनारे स्थित है, जो भूवैज्ञानिक दृष्टि से एक जटिल क्षेत्र है। भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव के कारण यह क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है। हालांकि, यहां पहले भी भूकंप आते रहे हैं, लेकिन मंगलवार को लगातार 8 बड़े झटकों ने पूरे चीन में हड़कंप मचा दिया है।


जापान में भी भूकंप के झटके

जापान में भी भूकंप का अनुभव

चीन में भूकंप के झटकों के बीच, जापान के इबाराकी प्रांत में भी तेज झटके महसूस किए गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह भूकंप मंगलवार को शाम 7:46 बजे आया और इसकी तीव्रता 5.5 मापी गई। इसका केंद्र जमीन से लगभग 50 किलोमीटर की गहराई में था।