चीन और ताइवान के बीच बढ़ता तनाव: वैश्विक चिंताएं
चीन का ताइवान पर दावा
नई दिल्ली। चीन ने ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानते हुए कहा है कि वह इसे एक दिन अपने साथ मिलाकर ही मानेगा। चीन इसे अपनी “वन चाइना पॉलिसी” के तहत देखता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र मानता है। ताइवान के पास अपनी सरकार, सेना और संविधान है, जिसे वह छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
अमेरिका की भूमिका
हालांकि अमेरिका और ताइवान के बीच कोई औपचारिक सैन्य संधि नहीं है, फिर भी अमेरिका ने ताइवान को सुरक्षा के लिए हथियार मुहैया कराने के लिए एक कानून (Taiwan Relations Act) बनाया है। हाल ही में अमेरिका ने ताइवान को अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम देने का निर्णय लिया है। इस प्रकार की अमेरिकी गतिविधियों को देखकर चीन को लगता है कि अमेरिका ताइवान को चीन से अलग करने की योजना बना रहा है।
चीन की सैन्य गतिविधियाँ
चीन अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ताइवान के चारों ओर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। चीनी युद्धपोत ताइवान के समुद्री क्षेत्र के निकट पहुँच चुके हैं, और चीन के कई लड़ाकू विमान ताइवान की सीमाओं के पास उड़ान भरते रहते हैं, जिससे ताइवान की वायु सेना पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
साइबर हमले की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान के सरकारी सिस्टम और इंटरनेट को बाधित करने का प्रयास कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने कार्यकाल में ताइवान को चीन में मिलाने की योजना बना रहे हैं। हाल के महीनों में चीन की भाषा आक्रामक हो गई है, और वे अब “शांतिपूर्ण एकीकरण” के बजाय “सैन्य कार्रवाई” के संकेत दे रहे हैं। यदि चीन ने ताइवान पर हमला किया, तो अमेरिका और जापान जैसे देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे यह एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
वैश्विक चिंताएँ
चिप संकट: दुनिया के 90% से अधिक उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स ताइवान में निर्मित होते हैं। यदि युद्ध होता है, तो वैश्विक स्तर पर फोन, कार और कंप्यूटर की आपूर्ति बाधित हो जाएगी या उनकी कीमतें बढ़ जाएंगी। ताइवान के चारों ओर स्थित समुद्री मार्ग (South China Sea) से भारत सहित कई देशों का अरबों डॉलर का व्यापार होता है, और युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बंद हो जाएगा, जिससे व्यापार ठप हो जाएगा।
वर्तमान में, दोनों पक्षों की सेनाएँ अलर्ट पर हैं। चीन का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस स्थिति में, ताइवान एक “टाइम बम” की तरह बन गया है, जो कभी भी फट सकता है।