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चीन का व्यापार सरप्लस: भारत की आर्थिक स्थिति पर सवाल

चीन ने अपने विदेशी व्यापार में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का लाभ दर्शाया है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का एक तिहाई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत का हिस्सा इस लाभ में लगभग 10 प्रतिशत है। जबकि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर है, यह दर्शाता है कि भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए चीन पर निर्भर है। जानें इस स्थिति के पीछे की वास्तविकता और इसके प्रभाव।
 

चीन का व्यापार सरप्लस और भारत का हिस्सा

चीन ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि उसके विदेशी व्यापार में लाभ 1.2 ट्रिलियन डॉलर है। यह आंकड़ा भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई है। इस लाभ में सबसे बड़ा योगदान 28 प्रतिशत का अफ्रीकी देशों से है, जबकि 13 प्रतिशत दक्षिण एशियाई देशों से आता है। इस रिपोर्ट के प्रकाश में आने के बाद, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने अनुमान लगाया कि चीन के कुल व्यापार लाभ में भारत का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है।


अगर 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार लाभ में भारत का हिस्सा 10 प्रतिशत यानी 112 बिलियन डॉलर है, तो यह जयराम रमेश का अनुमान है। दूसरी ओर, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर है। इसका मतलब यह है कि भारत का निर्यात थोड़ा बढ़ा है, फिर भी हम चीन से लगभग 15 लाख करोड़ रुपए का सामान अधिक आयात कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब 'मेक इन इंडिया' का प्रचार किया जा रहा है और यह दावा किया जा रहा है कि वैश्विक कंपनियां भारत में अपने उत्पाद बनाने या व्यापार करने के लिए आ रही हैं। वास्तविकता यह है कि भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से चीन पर निर्भर है।